अमेरिका ने बांग्लादेश को स्पष्ट किया कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन या हिंसक कार्रवाई में सरकार की भागीदारी का समर्थन नहीं करता है। यह बयान हाल ही में चटगांव में हिंदू समुदाय के सदस्यों और बांग्लादेशी कानून प्रवर्तन बलों के बीच हुई झड़प के बाद आया। यह झड़प इस्कॉन करने वाली एक फेसबुक पोस्ट के जरिए शुरू हुई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करता है, लेकिन हिंसक प्रतिक्रियाओं में किसी सरकार की भागीदारी का समर्थन नहीं करता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने दी प्रतिक्रिया
मैथ्यू मिलर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैं यहां से निजी राजनयिक कार्यक्रमों में बात नहीं करना चाहता हूं, लेकिन मैं बांग्लादेशी सरकार को यह स्पष्ट करता हूं कि हम शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन और हिंसक प्रतिक्रियाओं में किसी सरकार की भागीदारी का विरोध करते हैं।" इससे पहले भारत ने छह नवंबर को हिंदुओं पर हुए हमले की निंदा की थी और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से समुदाय के भीतर तनाव बढ़ेगा।
भारत ने बांग्लादेशी सरकार से की अपील
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "हमने देखा कि बांग्लादेश के चटगांव में हिंदू समुदाय पर हमले हुए हैं। सोशल मीडिया पर हिंदू धार्मिक संगठनों के खिलाफ भड़काऊ पोस्ट के बाद उनकी संपत्तियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को लूट लिया गया।" उन्होंने बांग्लादेशी सरकार से इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की।
रंधीर जयसवाल ने आगे कहा, "हमें समझ आ रहा है कि इन भड़काऊ पोस्ट और आपराधिक गतिविधियों के पीछे चरमपंथी तत्वों का हाथ है। ऐसी घटनाओं से समुदाय में तनाव उत्पन्न होना तय है। हम एक बार फिर बांग्लादेशी सरकार से अपील करते हैं कि वे इन चरमपंथी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करें और हिंसुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें। बता दें कि चटगांव में हिंदू समुदाय और कानून प्रवर्तन बलों के बीच संघर्ष बढ़ गया, जिसके बाद संयुक्त पुलिस और सेना बलों को अभियान चलाना पड़ा।
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