अमेरिकी वित्त मंत्रालय में आतंकवादी वित्तपोषण मामलों के सहायक सचिव जोनाथन बर्क ने अमेरिकी संसद को बताया कि प्रतिबंध, विरोधी ताकतों को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से अलग करने और अवैध गतिविधियों को बाधित करने का एक अहम उपकरण बने हुए हैं। बर्क ने कहा, 'प्रतिबंध, लक्षित संस्थाओं को अलग-थलग करने में बेहद अहम हैं और ये सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक पहुंच न मिले।'
प्रतिबंधों से कैसे विरोधियों को घुटनों पर लाती है अमेरिकी सरकार
अमेरिकी संसद के निचले सदन की एक उपसमिति के सामने गवाही देते हुए बर्क ने बताया कि प्रतिबंध सीधे प्रवर्तन के साथ-साथ निवारक के रूप में भी काम करते हैं। इनके जरिए वित्तीय प्रवाह को रोका जा सकता है, संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और वैश्विक बाजारों तक पहुंच सीमित की जा सकती है। उन्होंने कहा, 'इनका एक प्रमुख उद्देश्य व्यवधान पैदा करना है। उन्होंने साफ किया ये प्रतिबंध अमेरिका की वित्तीय प्रणाली की मदद करते हैं।
बर्क ने यह भी कहा कि प्रतिबंधों के डर से ही विरोधी देशों पर दबाव बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वित्त मंत्रालय इस बात पर काम कर रहा है कि प्रतिबंधों को लक्षित और रणनीतिक तरीके से लागू किया जाए। हालांकि उन्होंने ये भी माना कि इसका क्रियान्वयन मुश्किल बना हुआ है, खासकर तब जब विरोधी पक्ष नए-नए तरीकों से इनसे बचने की कोशिश कर रहे हैं।
विरोधी भी प्रतिबंधों से बचने के रास्ते खोज रहे
बर्क ने कहा, 'विरोधी अब शेल कंपनियों, डिजिटल एसेट्स और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों जैसे अधिक तरीकों का इस्तेमाल कर प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि प्रतिबंधों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उसकी समीक्षा की जा रही है। बर्क ने कहा कि वित्तीय संस्थानों के सामने बड़ी चुनौती यह है कि उन्हें बड़े पैमाने पर प्रतिबंध सूचियों के साथ लेन-देन की जांच करनी पड़ती है।
गौरतलब है कि अमेरिकी विदेश नीति में प्रतिबंध एक अहम तत्व बन चुके हैं, जिनका इस्तेमाल आतंकवाद के वित्तपोषण, परमाणु कार्यक्रमों और संगठित अपराध नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। समय के साथ इनका दायरा साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी तक भी बढ़ गया है।