अमेरिका की एक अदालत द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए जवाबी टैरिफ को असांविधानिक ठहराया है। इस पर अमेरिका के वाणिज्य विभाग के पूर्व व्यापार विकास सहायक सचिव रे विकेरी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन को व्यापार घाटे की गलत समझ है। व्यापार घाटा केवल दूसरे देश की गलत नीतियों ने नहीं होता, बल्कि यह अमेरिका की अपनी बचत और खर्च की आदतों से भी जुड़ा होता है।
विकेरी ने कहा, इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी। मामला शायद सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। यानी यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। इस संघीय अदालत ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सरकार ने 10 फीसदी टैरिफ और कनाडा और मैक्सिको पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ सहित सभी प्रकार के टैरिफ लगाकर कानून का उल्लंघन किया है। ट्रंप प्रशासन को व्यापार घाटे की गलत समझ है। व्यापार घाटा केवल दूसरे देश की गलत नीतियों से नहीं होता, यह अमेरिका की अपनी बचत और खर्च की आदतों से भी जुड़ा होता है।
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वैश्विक आतंकवाद पर क्या बोले विकेरी
उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में हमने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खतरे को नजरअंदाज किया, क्योंकि वह कुछ हद तक कम हो गया था। लेकिन पहलगाम में धार्मिक आधार पर 26 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की हत्या से साफ है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद अभी भी जीवित है। इससे निपटने के लिए मिलकर की बहुत सख्त कार्रवाई की जरूरत है। क्या अमेरिका और खासकर विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पाकिस्तान को एक आसान रास्ता दिया? हां, मुझे लगता है ऐसा किया गया।
विकेरी ने आगे कहा, भारत के साथ मिलकर लंबे समय तक काम करना जरूरी है, न कि पाकिस्तान और भारत को बराबरी पर रखकर। आतंकवाद से लड़ाई के लिए भारत के साथ खास सहयोग चाहिए। अमेरिका का अफगानिस्तान और इस्राइल का गाजा में अनुभव बताता है कि व्यापक युद्ध से इस्लामी आतंकवाद को खत्म नहीं किया जा सकता।
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'हर चीज का श्रेय लेना चाहता है ट्रंप प्रशासन'
भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम में ट्रंप की भूमिका पर उन्होंने कहा, ट्रंप प्रशासन हर उस चीज का श्रेय लेना चाहता है जिससे उसे या ट्रंप को कोई फायदा दिखे। मुझे भरोसा है कि अमेरिका की भूमिका को बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है। भारत सरकार ने भी ट्रंप को कोई खास श्रेय नहीं दिया है। सुरक्षा और आर्थिक मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रंप की तरह व्यापारिक संबंधों का इस्तेमाल किसी देश पर दबाव डालने के लिए किया जाए। भारत ने ठीक किया कि उसने पूरा फोकस अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर रखा।
'व्यापार घाटा नाइंसाफी की निशानी नहीं'
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार के मुद्दे पर विकेरी ने कहा, ट्रंप सरकार के पहले कार्यकाल में भारत और अमेरिका के बीच एक बेहतर व्यापार समझौते की कोशिश हुई थी, जो लगभग सफल हो गई थी। उम्मीद है कि ऐसा समझौता फिर से हो सकेगा। लेकिन ट्रंप की धमकाने वाली नीति के साथ ऐसा मुमकिन नहीं है। उन्होंने 'जवाबी टैरिफ' जैसी बातें की हैं। व्यापार घाटे को नाइंसाफी की निशानी मानना सही नहीं है। व्यापार घाटा कई आर्थिक और वित्तीय कारणों से होता है।