2018 में भी सऊदी अरब की वास्तविक सत्ता मोहम्मद बिन सलमान के हाथ में थी। खशोगी ने द वाशिंगटन पोस्ट में अपने स्तंभों में प्रिंस सलमान की नीतियों की आलोचना की थी। 59 वर्षीय खशोगी को दो अक्टूबर 2018 को इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में आने के लिए राजी किया गया। सीआईए को मिली जानकारियों के मुताबिक वहां प्रिंस सलमान से जुड़े लोगों खशोगी की हत्या कर दी। सऊदी वाणिज्य दूतावास में जाने के बाद खशोगी वापस नहीं आए। ना ही उनका शव बरामद हुआ।
प्रिंस ही चला रहे असली शासन
जो बाइडन ने अमेरिकी मीडिया से कहा था कि उन्होंने खशोगी हत्याकांड पर तैयार रिपोर्ट को पढ़ा है और इस बारे में वे सऊदी शाह मोहम्मद बिन सलमान से बात करेंगे। सऊदी शाह 85 साल के हैं। प्रिंस सलमान उनके बेटे हैं। वही देश के अगले शासक होंगे, हालांकि माना जाता है कि कई वर्षों से असली शासन वही चला रहे हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद सऊदी अरब के प्रति अमेरिका की नीति बदल गई है, इसके बहुत साफ संकेत हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सऊदी शासकों के प्रति रुख नरम था। उन्होंने यमन के युद्ध में भी सऊदी समर्थित गुट की मदद की थी,लेकिन बाइडन ने वह नीति बदल दी है। अब शाह सलमान से बातचीत में उन्होंने कड़ा संदेश दिया है।
खशोगी की हत्या में लिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई का संकेत
सीआईए की गोपनीय रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में पेश की जा चुकी है। उसका जो हिस्सा शनिवार को जारी होगा, उसमें गोपनीय पहलू शामिल नहीं होंगे। बाइडन प्रशासन ने पहले भी यह संकेत दिया है कि खशोगी की हत्या में शामिल रहे लोगों के खिलाफ वह कड़ी कार्रवाई करेगा।
ह्वाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने गुरुवार को कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिनको लेकर अमेरिका चिंता जताएगा, जबकि कुछ मामलों में वह जवाबदेही तय करने का विकल्प खुला रखेगा। इसके पहले अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने पिछले हफ्ते कहा था कि रिपोर्ट जारी होने के बाद खशोगी हत्याकांड के मामले में अमेरिका अतिरिक्त कदम उठाएगा।
इस महीने के आरंभ में बाइडन प्रशासन ने सऊदी अरब के लिए अरबों डॉलर के हथियारों की बिक्री पर रोक लगा दी थी। इस बिक्री को लेकर अमेरिका में पहले भी एतराज उठाए गए थे, लेकिन 2019 में ट्रंप प्रशासन ने ईरान से बढ़ते तनाव को आधार बना कर इस मामले में सभी आपत्तियों को दरकिनार कर दिया था। अब बाइडन प्रशासन ने कहा है कि हथियारों की बिक्री के मामले में अंतिम फैसला इस बारे में पूरी समीक्षा के बाद किया जाएगा।
बढ़ेंगी सऊदी अरब की मुश्किलें
जानकारों का कहना है सीआईए की रिपोर्ट जारी होने के बाद अमेरिका के लिए सऊदी अरब के हक में फैसला करना और कठिन हो जाएगा। इससे लगता है कि सऊदी अरब के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।