सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को सेना में ट्रांसजेंडरों पर प्रतिबंध लागू करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई आगे जारी रहेगी। कोर्ट के तीन न्यायाधीशों ने कहा था कि इस नीति को रोक देना चाहिए, लेकिन बाकी न्यायाधीशों ने इसे अभी लागू रखने की अनुमति दी।
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को सेना में ट्रांसजेंडरों पर प्रतिबंध लागू करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, कानूनी चुनौतियां जारी रहेंगी। इस नीति के अनुसार, ट्रांसजेंडर लोग सेना में काम नहीं कर सकते और जो पहले से सेना में हैं, उन्हें बाहर निकाला जा सकता है। अदालत ने मंगलवार को इस नीति पर विवाद में कार्रवाई की। कोर्ट के तीन न्यायाधीशों ने कहा था कि इस नीति को रोक देना चाहिए, लेकिन बाकी न्यायाधीशों ने इसे अभी लागू रखने की अनुमति दी।
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जनवरी में दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने ट्रांसजेंडरों के अधिकारों को सीमित करने के लिए कई कदम उठाए। रिपब्लिकन राष्ट्रपति ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर दावा किया ता कि ट्रांसजेंडर लोगों की पहचान सेना के अनुशासन और ईमानदारी से मेल नहीं खाती और यह सेना की तैयारी को नुकसान पहुंचाती है। इसके बाद, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक आदेश जारी किया, जिसमें सैन्य सेवाओं को यह तय करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया कि वे ट्रांसजेंडर सैनिकों को सेना से कैसे हटाएंगे। हेगसेथ ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'डीओडी में अब कोई ट्रांस नहीं।'
न्यायाधीश सेटल ने सात सेवारत ट्रांसजेंडरों के पक्ष में सुनाया था फैसला
मंगलवार को न्यायाधीशों ने जिस मामले में कार्यवाही की, उसमें वाशिंगटन के टैकोमा में अमेरिकी जिला न्यायालय के न्यायाधीश बेंजामिन सेटल ने सात लंबे समय से सेवारत ट्रांसजेंडर सैन्य सदस्यों के पक्ष में फैसला सुनाया था। उन्होंने अदालत में कहा कि यह नीति उनके साथ भेदभाव करती है और उनके करियर व प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाएगी। उनमें से एक, एमिली शिलिंग ने भी मुकदमा दायर किया, जो 20 साल से नौसेना में हैं और इराक व अफगानिस्तान में मिशन पूरे कर चुकी हैं।
न्यायाधीश सेटल ने इस नीति पर लगाई थी रोक
न्यायाधीश सेटल ने सरकार से पूछा कि जब ट्रांसजेंडर लोग पिछले चार सालों से बिना किसी समस्या के सेना में सेवा कर रहे हैं, तो अब अचानक उनके खिलाफ यह नियम क्यों लागू किया जा रहा है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। सेटल ने इस नीति पर राष्ट्रव्यापी रोक लगा दी और संघीय अपील न्यायालय ने प्रशासन की आपातकालीन याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद न्याय विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।
LGBTQ अधिकार समूह ने कोर्ट के फैसले को निराशाजनक बताया
हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस नीति को अभी लागू किया जा सकता है, लेकिन इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई आगे जारी रहेगी। ट्रांसजेंडरों के समर्थन में काम करने वाले LGBTQ अधिकार समूह लैम्ब्डा लीगन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि फैसला पूर्वाग्रह पर आधारित है, न कि सेना की जरूरतों पर।