पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के संभावित समझौते को लेकर एक अहम शर्त सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बेहद विस्तृत और सख्त निगरानी व्यवस्था शामिल करना जरूरी होगा।
ग्रॉसी ने दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम काफी व्यापक और महत्वाकांक्षी है, इसलिए इसकी निगरानी के लिए आईएईए निरीक्षकों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो समझौता सिर्फ एक भ्रम बनकर रह जाएगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ दूसरे दौर की वार्ता अगले दो दिनों में हो सकती है। ट्रंप प्रशासन ने साफ किया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इस संघर्ष का प्रमुख उद्देश्य है।
हालांकि, ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वह हथियार नहीं बना रहा। लेकिन वह अपने कार्यक्रम पर किसी तरह की सख्ती या सीमाएं लगाने से इनकार करता रहा है।
पिछले सप्ताह पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच हुई शुरुआती बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी। व्हाइट हाउस ने इसके लिए ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को मुख्य बाधा बताया, जबकि ईरानी पक्ष ने इस दावे को खारिज किया।
आईएईए की एक गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक, जून में 12 दिन चले संघर्ष के दौरान इस्राइल और अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए ईरानी परमाणु ठिकानों तक एजेंसी को अब तक पहुंच नहीं दी गई है। ऐसे में आईएईए यह पुष्टि नहीं कर पा रहा है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन गतिविधियां रोकी हैं या नहीं, और उसके पास कुल कितना परमाणु सामग्री भंडार मौजूद है।