फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

US-Iran War: अमेरिका को मिला आईएईए का साथ, कहा- ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पूरी तरह से होनी चाहिए जांच

Wed, 15 Apr 2026 12:56 PM IST
Riya Dubey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी संभावित समझौते की सफलता कड़ी और विस्तृत निगरानी व्यवस्था पर निर्भर करेगी। आइए विस्तार से जानते हैं। 
विज्ञापन
पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के संभावित समझौते को लेकर एक अहम शर्त सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बेहद विस्तृत और सख्त निगरानी व्यवस्था शामिल करना जरूरी होगा।

समझौता सिर्फ एक भ्रम बनकर रह जाएगा

ग्रॉसी ने दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम काफी व्यापक और महत्वाकांक्षी है, इसलिए इसकी निगरानी के लिए आईएईए निरीक्षकों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो समझौता सिर्फ एक भ्रम बनकर रह जाएगा।

ट्रंप ने दूसरे दौर की वार्ता के दिए संकेत 

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ दूसरे दौर की वार्ता अगले दो दिनों में हो सकती है। ट्रंप प्रशासन ने साफ किया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इस संघर्ष का प्रमुख उद्देश्य है।

क्या है ईरान का पक्ष?

हालांकि, ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वह हथियार नहीं बना रहा। लेकिन वह अपने कार्यक्रम पर किसी तरह की सख्ती या सीमाएं लगाने से इनकार करता रहा है।

इस्लामाबाद की वार्ता में नहीं निकला कोई नतीजा

पिछले सप्ताह पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच हुई शुरुआती बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी। व्हाइट हाउस ने इसके लिए ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को मुख्य बाधा बताया, जबकि ईरानी पक्ष ने इस दावे को खारिज किया।

आईएईए की गोपनीय रिपोर्ट में क्या आया सामने?

आईएईए की एक गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक, जून में 12 दिन चले संघर्ष के दौरान इस्राइल और अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए ईरानी परमाणु ठिकानों तक एजेंसी को अब तक पहुंच नहीं दी गई है। ऐसे में आईएईए यह पुष्टि नहीं कर पा रहा है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन गतिविधियां रोकी हैं या नहीं, और उसके पास कुल कितना परमाणु सामग्री भंडार मौजूद है।

विज्ञापन


रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास करीब 440.9 किलोग्राम यूरेनियम है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया है। यह स्तर 90 प्रतिशत के हथियार-ग्रेड के काफी करीब माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मात्रा सैद्धांतिक रूप से 10 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त हो सकती है, यदि ईरान ऐसा करने का फैसला करता है।

आईएईए के नियमों के तहत इस तरह के उच्च संवर्धित परमाणु पदार्थ की हर महीने जांच जरूरी होती है। ऐसे में ग्रॉसी ने जोर देकर कहा कि किसी भी भविष्य के समझौते की विश्वसनीयता इसी बात पर निर्भर करेगी कि उसमें निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था कितनी मजबूत और पारदर्शी होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन



विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें