अमेरिका में वीजा से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है। ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा समेत कुछ अन्य अस्थायी कार्य वीजा धारकों को नौकरी जाने के बाद अमेरिका में नई नौकरी या प्रायोजक तलाशने के लिए मिलने वाली 60 दिन की मोहलत खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव लागू होने पर रोजगार समाप्त होते ही संबंधित विदेशी कामगारों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।
क्या विदेशी कामगार को फिर नियुक्त कर सकेंगी कंपनियां?
नियमों में बदलाव के बाद नियोक्ता या तो समान रूप से योग्य अमेरिकी कामगारों को नौकरी देने का विकल्प चुन सकते हैं या अपनी जरूरत के मुताबिक आई-129 याचिका प्रक्रिया के जरिये विदेशी कामगार को फिर नियुक्त कर सकते हैं।
2017 से लागू है 60 दिन का ग्रेस पीरियड
60 दिन का यह ग्रेस पीरियड 2017 से लागू है। इसका उद्देश्य नौकरी गंवाने वाले विदेशी कामगारों को नई अमेरिकी नौकरी तलाशने या देश छोड़ने से पहले अपने जरूरी मामलों को व्यवस्थित करने का समय देना है। इसमें घर बेचने या बच्चों को स्कूल से निकालने जैसे निजी इंतजाम भी शामिल हैं।
ग्रेस पीरियड नियम कब बना, विदेशी कामगारों पर इसका कितना असर?
वीजा से जुड़े ग्रेस पीरियड का यह नियम पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में बनाया गया था। 2016 में इस नियम को जोड़ने का मकसद उच्च स्तरीय स्तर पर कुशल श्रमिकों की नौकरी में स्थिरता और लचीलेपन को बढ़ावा देना था। इससे अमेरिकी कंपनियों को गैर-अप्रवासी लोगों को काम पर रखने और उनका तबादला करने में आसानी होती थी।