अमेरिकी सीनेट में प्रस्ताव पेश
- फोटो : एएनआई
अमेरिका की सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के दो प्रभावशाली सीनेटर्स ने बाइडन सरकार के एक फैसले को बदलने का प्रस्ताव पेश किया है। अगर यह प्रस्ताव मान लिया जाता है तो इसका अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों पर विपरीत असर पड़ेगा। दरअसल रिपब्लिकन सांसदों ने अपने प्रस्ताव में रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज (EAD) के स्वतः नवीनीकरण की समय सीमा को घटाकर फिर से 180 दिन करने की मांग की है। बाइडन सरकार ने इस समय सीमा को बढ़ा दिया था। सीनेटर्स का कहना है कि बाइडन सरकार के फैसले से अमेरिकी सीमाओं की सुरक्षा प्रभावित होगी।
परमिट की अवधि बढ़ाने का विरोध
बाइडन सरकार में रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज (EAD) के नवीनीकरण की अवधि को 180 दिन से बढ़ाकर 540 दिन कर दिया गया था। अब सीनेट में पेश प्रस्ताव में नवीनीकरण की अवधि को वापस 180 दिन करने की मांग की गई है। रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज से अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम करने वाले लोगों के जीवनसाथियों को बहुत मदद मिलती है। एच-1बी वीजा के सबसे ज्यादा लाभार्थी भारतीय हैं। ऐसे में नए प्रस्ताव को अगर मंजूरी मिल जाती है तो इसका भारतीय कामगारों पर विपरीत असर पड़ना तय है।
गुरुवार को प्रस्ताव पेश करने वाले सीनेटर जॉन कैनेडी और रिक स्कॉट ने प्रस्ताव में कांग्रेसनल रिव्यू एक्ट (सीआरए) प्रक्रिया के तहत बाइडन प्रशासन में बनाए गए नियम को अस्वीकार करने की मांग की है। कैनेडी ने कहा, 'बाइडन प्रशासन के खतरनाक नियम ने अप्रवासियों के लिए वर्क परमिट को स्वचालित रूप से 540 दिनों तक बढ़ा दिया है। अप्रवासियों को अमेरिकी अधिकारियों को रिपोर्ट करने से बचने के लिए अधिक समय देने से ट्रंप प्रशासन को आव्रजन कानूनों को लागू करने और अमेरिकियों को सुरक्षित रखने के प्रयासों में बाधा आएगी।'
सीनेटर्स का दावा- इस नियम से ट्रंप प्रशासन को होगी परेशानी
स्कॉट ने एक बयान में आरोप लगाया कि बाइडन-हैरिस प्रशासन ने अमेरिका की आव्रजन प्रणाली को खत्म करने और दक्षिणी सीमा को खोलने के लिए लगातार चार साल तक काम किया, जिससे लाखों अवैध विदेशी बिना जांचे-परखे और बिना जांचे सीमा पार कर आए।' दोनों सीनेटर्स ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस बाइडन प्रशासन के नियम को पलटने में विफल रहती है, तो ट्रंप प्रशासन को अमेरिका में अवैध रूप से रहने और काम करने वालों का पता लगाने में अधिक परेशानी होगी।