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US: दक्षिण चीन सागर में भारत की भूमिका पर बाइडन प्रशासन का बड़ा बयान, कहा- सहयोगी देशों की बढ़ा रहे क्षमता

Thu, 29 Jun 2023 09:45 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

US: बाइडन प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि उनका देश विवादित दक्षिण चीन सागर में भारत की बढ़ती भूमिका को देख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच सहयोग होगा।
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दक्षिण चीन सागर - फोटो : Reuters
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विस्तार
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अमेरिका में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होना है। लेकिन उससे पहले राजनीतिक दलों और राजनेताओं के बीच चीन की बढ़ती आक्रामकता प्रमुख मुद्दा बनकर उभर रहा है। इस बीच, बाइडन प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि उनका देश विवादित दक्षिण चीन सागर में भारत की बढ़ती भूमिका को देख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच सहयोग होगा।

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यह टिप्पणी पूर्वी एशियाई और प्रशांत मामलों के लिए सहायक राज्य सचिव डेनियल क्रिटेनब्रिंक ने कीं। वह सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) की ओर से आयोजित तेहरवें वार्षिक दक्षिण चीन सागर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। चीन दक्षिण चीन सागर (एससीएस) 3366984.543 किलोमीटर तक क्षेत्र पर दावा करता है और इसे अपना संप्रभु क्षेत्र बताता है।
 

चीन ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम के दावे वाले क्षेत्र में कृत्रिम द्वीपों पर सैन्य अड्डे भी बना रहा है। उसने वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों द्वारा मछली पकड़ने या खनिज अन्वेषण जैसी वाणिज्यिक गतिविधियों को भी यह दावा करते हुए बाधित किया हुआ है कि इस क्षेत्र पर सैकड़ों वर्षों से चीन का स्वामित्व था। अमेरिका समय-समय पर नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर देने के लिए अपने नौसैनिक जहाजों और लड़ाकू विमानों को इस क्षेत्र में तैनात करता रहा है।
 

यह पूछे जाने पर कि क्या क्रिटेनब्रिंक दक्षिण चीन सागर में भारत की बढ़ती भूमिका देखते हैं और क्या इसमें अमेरिका-भारत सहयोग होगा, उन्होंने कहा, अमेरिका-भारत साझेदारी का विकास; ऑस्ट्रेलिया, जापान, भारत और अमेरिका की क्वाड समूह के रूप में गतिविधियां और कुछ महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाक्रम हैं। मुझे लगता है कि यह सब मैंने अपने जीवनकाल में पहली बार देखा है। उन्होंने कहा, हमारा पूरा फोकस इस क्षेत्र के सहयोगियों, साझेदारों, मित्रों और उन सभी देशों की क्षमता का निर्माण करने पर है, जो इस दृष्टिकोण को साझा करते हैं कि हम एक ऐसी दुनिया में रहना चाहते हैं जो शांतिपूर्ण और स्थिर हो। 
 
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उन्होंने कहा, समान नियमों का पालन करने वाले छोटे-बड़े देश हैं। हम इस दृष्टिकोण को अपनाने वाले किसी भी देश के साथ सहयोग का स्वागत करेंगे। इसमें भारत भी शामिल है। मुझे लगता है कि इसमें पूरे एशिया में हमारे अधिकांश साझेदार शामिल हैं। क्रिटेनब्रिंक ने कहा कि अमेरिका मानता है कि दक्षिण चीन सागर के सभी दावेदारों को अपने समुद्री दावों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप करना चाहिए, जैसाकि 1982 की समुद्री संधि में परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि दक्षिण चीन सागर के दावेदार देशों को अपने विशेष आर्थिक क्षेत्रों का इस्तेमाल करने में सक्षम होना चाहिए। 
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