सूडान में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नए और कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अरब और अफ्रीकी मामलों के वरिष्ठ सलाहकार मासाद बोलोस ने सोमवार को कहा कि प्रतिबंधों के जरिए युद्ध में शामिल दोनों पक्षों पर बातचीत के लिए दबाव बढ़ाया जा सकता है। सूडान में चल रही इस लड़ाई में अब तक कम से कम 59 हजार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1.3 करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं। देश के कई हिस्से अकाल की चपेट में हैं।
किस पर लगाया जाएगा प्रतिबंध?
बोलोस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि सूडानी सेना और प्रतिद्वंद्वी अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को मिल रहा वित्तीय, सैन्य और राजनीतिक समर्थन संघर्ष को लंबा खींच रहा है। उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन मिस्र सूडान की सेना का खुलकर समर्थन करता रहा है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात पर UN विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने RSF को हथियार मुहैया कराने का आरोप लगाया है। UAE इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
पूरे सूडान में हथियार प्रतिबंध का प्रस्ताव
अमेरिका ने सुरक्षा परिषद के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जिसमें सूडान के पूरे क्षेत्र में हथियारों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। मौजूदा प्रतिबंध मुख्य रूप से पश्चिमी दारफुर क्षेत्र तक सीमित है। प्रस्ताव में सूडान में सक्रिय सभी पक्षों पर प्रतिबंध लागू करने और ड्रोन व उनसे जुड़ी तकनीक को भी हथियार प्रतिबंध के दायरे में रखने की बात कही गई है। अमेरिकी प्रस्ताव में सभी देशों से सूडान के युद्धरत पक्षों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सैन्य, वित्तीय और लॉजिस्टिक मदद बंद करने की मांग की गई है। अमेरिका का कहना है कि बाहरी सहायता युद्ध को जारी रखने और शांति प्रयासों को कमजोर करने में भूमिका निभा रही है।
ड्रोन भी बन चुके हैं युद्ध का अहम हिस्सा
विशेषज्ञों के मुताबिक, सूडानी सेना और RSF दोनों नए ड्रोन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों ने भी कहा है कि सूडान में जारी संघर्ष के दौरान ड्रोन और मानवरहित विमान प्रणालियों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। अमेरिकी प्रस्ताव में तीसरे देशों से ड्रोन और अन्य मानवरहित प्रणालियों के जरिए की जाने वाली सैन्य सहायता पर भी चिंता जताई गई है।
सूडान की सेना ने प्रतिबंधों को ठुकराया
सूडान के सेना प्रमुख जनरल अब्देल-फतह बुरहान ने सोमवार को कहा कि नए प्रतिबंध उनकी सेना को युद्ध जारी रखने से नहीं रोक पाएंगे। सेना नियंत्रित समाचार एजेंसी SUNA के अनुसार, उन्होंने कहा कि जब तक RSF के कब्जे वाले सभी इलाकों को वापस नहीं लिया जाता, तब तक सैन्य अभियान जारी रहेगा।
UN ने भी जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र की राजनीतिक प्रमुख रोजमेरी डिकार्लो ने सुरक्षा परिषद में कहा कि सरकार और अर्धसैनिक बलों के नेताओं को बातचीत की मेज पर लाने के लिए कई कूटनीतिक प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन दोनों पक्ष अभी भी सैन्य समाधान की सोच से बाहर नहीं निकल पाए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की सोच बदलने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा ध्यान और तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।