अमेरिका की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों में ये आम राय उभरी है कि मौजूदा वैश्विक होड़ में अमेरिका को एक साथ कई विरोधी देशों का सामना करना पड़ रहा है। इन देशों में सबसे अहम चीन है। बीते हफ्ते अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के ऊपरी सदन सीनेट की सशस्त्र सेना समिति की तरफ से आयोजित सुनवाई में ये राय उभरी। अधिकारियों ने कहा कि हालांकि अभी यूक्रेन युद्ध सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन अमेरिका को मुख्य चुनौती चीन से है। इसलिए अमेरिका को ताइवान के मामले में चीनी सेना की योजनाओं पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन में स्थित डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक स्कॉट बेरियर ने कहा कि ये चारों देश अमेरिका के लिए खतरा पैदा कर रहे हैँ। ताइवान के प्रति चीन का रुख आक्रामक है, रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है, ईरान पश्चिम एशिया में छद्म युद्ध में जुटा हुआ है, और उत्तर कोरिया पश्चिम प्रशांत क्षेत्र और उससे लगी अमेरिकी भूमि के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक अमेरिका का यह मानना कि चीन, रूस, ईरान, और उत्तर कोरिया अमेरिका, नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन), यूपोयिन यूऩियन. और जापान के सामने खड़े हो गए हैं, एक तरह के वैश्विक युद्ध की बिसात सजने जैसा है। लेकिन उसकी एजेंसियों की यह राय भी है कि इस मुद्दे पर दुनिया के ज्यादातर देश उसके साथ खड़े नहीं हैं।
हेइन्स ने कहा कि बड़े लोकतांत्रिक देशों ने अभी तक अपना पक्ष नहीं चुना है। उन्होंने इस सिलसिले में भारत, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, और दक्षिण अफ्रीका का नाम लिया। साथ ही कहा कि कई अन्य विकासशील देशों का भी ऐसा ही रुख है। बेरियर ने कहा- ‘दुनिया का ज्यादातर हिस्सा हमारे साथ नहीं है। संभव है कि वे रूस के साथ भी नहीं हों। लेकिन लोकतांत्रिक देशों का वैश्विक गठबंधन बनाने के हमारे आह्वान से वे सहमत नहीं दिखते हैं।’ उन्होंने कहा- ‘अमेरिका के अभी भी उन देशों के साथ दोस्ताना रिश्ते हैं, लेकिन हम उन देशों को यूक्रेन के मसले पर अपने साथ खड़ा नहीं कर पाए हैं।’