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US-Iran Conflict: अमेरिकी सेना ने दिन के उजाले में शुरू किए हवाई हमले, क्या पश्चिम एशिया में बढ़ेगा तनाव?

Wed, 15 Jul 2026 05:10 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई।

सार

अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने दिन के उजाले में ईरान पर नए दौर के हमलों की शुरुआत कर दी है। सेना ने कहा कि उसने टुनब द्वीप पर हमला किया है। पढ़िए रिपोर्ट-
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ईरान पर अमेरिका के ताबड़तोड़ हमले - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान को निशाना बनाकर हवाई हमलों का नया दौर शुरू कर दिया है। सेना ने बुधवार को दिन के उजाले में इन हमलों की शुरुआत की। यह हमलों की बढ़ती रफ्तार का ही एक हिस्सा है।
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अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने ऑनलाइन जारी एक बयान में इस बात की पुष्टि की कि हमले शुरू कर दिए गए हैं। पिछले कुछ दिनों से किए जा रहे हमलों में अमेरिका ने ईरान को केवल रात के समय निशाना बनाया था।

ये भी पढ़ें: 30 से ज्यादा मौतें, 260 से ज्यादा घायल...अमेरिकी हमले से ईरान में भारी तबाही, क्या अब और भड़केगा युद्ध?
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सेंटकॉम ने क्या कहा?
सेंटकॉम ने कहा, 'इन हमलों का मकसद ईरानी सेना की उन सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल वह होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने के लिए कर रही हैं।' ये हमले ऐसे समय में किए गए हैं, जब ईरान और अमेरिका के बीच हुआ अंतरिम समझौता पूरी तरह से टूट चुका है। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंटकॉम ने कहा कि उसने ईरान के रक्षा और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाते हुए ग्रेटर टुनब द्वीप पर हमला किया है।  

अमेरिका ने ईरान पर फिर से नौसैनिक नाकाबंदी लगा दी है और आज से हवाई हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिका ने यह कार्रवाई तेहरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किए गए हमलों के जवाब में की है। 

कितना नुकसान हुआ अमेरिकी हमलों में?
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में ईरानी सेना की एक बैरक को निशाना बनाया गया, जिसमें सात सैनिकों की मौत हो गई और पूरे देश में 260 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

क्या फिर व्यापक युद्ध का खतरा बढ़ गया है?
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से एक-दूसरे पर जारी हमलों और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम जलमार्ग को लेकर दी गई नई धमकियों ने संघर्ष खत्म करने वाले अंतरिम समझौते को पूरी तरह कमजोर कर दिया है।इससे क्षेत्र में दोबारा बड़े स्तर पर युद्ध का खतरा बढ़ गया है।

पहले कब लगाई गई थी नाकाबंदी?
अमेरिका ने पहली बार अप्रैल में ईरान पर नाकाबंदी लगाई थी। इसके बाद पिछले महीने अंतरिम समझौता होने के बाद इसे हटा दिया गया था। इस समझौते के तहत हमले रोक दिए गए थे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया था। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते संघर्ष के कारण ये बातचीत रुक गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों बना तनाव का केंद्र?
अमेरिका और इस्राइल ने जब 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था, तब तेहरान ने प्रभावी रूप से इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही बंद कर दी थी। इस कदम से तेल, उर्वरक और कई अन्य वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं। इससे ईरान को बातचीत में काफी बढ़त मिल गई थी।

क्या बढ़ती कीमतें ट्रंप के लिए बनी चुनौती?
बढ़ती कीमतें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी चुनौती हैं। पार्टी नवंबर में होने वाले चुनावों में संसद पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की उम्मीद कर रही है। हालांकि, अमेरिका इस जलमार्ग को फिर से खोलने में संघर्ष कर रहा है।
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ऊर्जा निर्यात रोकने की धमकी दे रहा ईरान
ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने बुधवार को नाकाबंदी के जवाब में पश्चिम एशिया से होने वाले सभी ऊर्जा निर्यात को रोकने की धमकी दी। आईआरजीसी ने कहा, इस क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए भी नहीं होगा।
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