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Ukraine Peace Talks: संघर्ष विराम की कोशिश या रणनीतिक खेल..., US-रूस की बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

Thu, 10 Jul 2025 08:09 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कुआलालंपुर

सार

मलयेशिया में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच मुलाकात हुई। यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए दोनों देशों ने नई वार्ता योजनाओं पर चर्चा की। चीन से क्षेत्रीय तनाव और रूस के समर्थन पर भी बातचीत हुई।
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डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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मलयेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों को लेकर एक अहम बैठक हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच गुरुवार को 50 मिनट की बातचीत हुई। रूबियो ने कहा कि दोनों देशों ने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने को लेकर नई और अलग सोच साझा की है, हालांकि यह कोई गारंटी नहीं कि इससे तुरंत शांति आएगी।
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रूबियो ने कहा कि वे इन विचारों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक पहुंचाएंगे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप रूस की ओर से लचीलापन न दिखाने को लेकर निराश हैं। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे इस युद्ध को खत्म किया जा सकता है। यह मीटिंग अमेरिका-आसियान सम्मेलन के दौरान हुई, जिसमें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय देश और अमेरिका समेत 10 दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के मंत्री शामिल थे।

टैरिफ को लेकर बढ़ सकती है अमेरिका की मुश्किल
हालांकि अमेरिका की यह कूटनीतिक कोशिश उस वक्त मुश्किल में पड़ सकती है जब ट्रंप सरकार ने एक अगस्त से टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी है। रूबियो ने आसियान के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की और उन्हें आश्वस्त किया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र अमेरिकी विदेश नीति का अहम हिस्सा बना रहेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका को किसी अन्य देश की अनुमति की जरूरत नहीं है।
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टैरिफ के दबाव में आसियान देश, चीन पर फोकस नहीं
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका का चीन विरोधी रुख इन देशों को ज्यादा नहीं भाएगा, क्योंकि अधिकांश आसियान देशों की अर्थव्यवस्था अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से प्रभावित हो रही है। मलयेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा कि वैश्विक व्यापार को अब एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे छोटे देश दबाव में हैं।

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आसियान देशों पर 25 से 40 फीसदी तक टैक्स का खतरा
ट्रंप सरकार ने आसियान के 10 में से 8 देशों को टैरिफ नोटिस भेज दिए हैं। ब्रुनेई और फिलीपींस पर क्रमशः 25% और 20% टैक्स लगाया गया है। बाकी देशों में कंबोडिया (36%), इंडोनेशिया (32%), लाओस (40%), मलयेशिया (25%), म्यांमार (40%) और थाईलैंड (36%) शामिल हैं। वियतनाम ने 20% टैक्स के साथ व्यापार समझौता कर लिया है जबकि सिंगापुर पर पहले से ही 10% टैक्स है।

रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन की भूमिका पर भी नजर
अमेरिकी अधिकारी चीन पर लगातार आरोप लगा रहे हैं कि वह रूस के सैन्य उद्योग को सहायता दे रहा है जिससे रूस ज्यादा हथियार बना सके। रूबियो की चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि वांग जैसे अनुभवी नेता आसियान की राजनीतिक नब्ज अच्छे से जानते हैं, जबकि रूबियो के “अमेरिका फर्स्ट” संदेश पर एशियाई देशों में संदेह है।

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दूसरी बार आमने-सामने हुए रूबियो और लावरोव
यह दूसरी बार है जब रूबियो और लावरोव आमने-सामने बैठे। इससे पहले फरवरी में रियाद, सऊदी अरब में दोनों की पहली मुलाकात हुई थी, जब ट्रंप प्रशासन रूस और यूक्रेन के रुख को लेकर स्थिति समझना चाहता था। अब जबकि अमेरिका ने यूक्रेन को सैन्य सहायता फिर से भेजनी शुरू कर दी है, यह बातचीत और भी अहम हो गई है।
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परमाणु ऊर्जा सहयोग पर भी हुआ समझौता
गुरुवार को रूबियो ने मलयेशिया के विदेश मंत्री के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों में सहयोग की दिशा में पहला कदम है। यह ‘123 समझौता’ कहलाता है और अमेरिकी कानून की धारा 123 के तहत आता है, जिससे अमेरिकी कंपनियां विदेशी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में सुरक्षित निवेश कर सकती हैं।

क्या यूक्रेन युद्ध का हल निकलेगा या और उलझेगा मामला?
अब सवाल यह है कि अमेरिका और रूस की ये नई बातचीत क्या वाकई युद्ध खत्म करने की दिशा में कोई ठोस रास्ता निकालेगी या यह सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता बनकर रह जाएगी? ट्रंप प्रशासन के टैरिफ फैसले और चीन से जुड़ी चुनौतियों के बीच अमेरिका के लिए एशिया में विश्वास कायम रखना आसान नहीं होगा। वहीं यूक्रेन युद्ध में किसी भी तरह की बड़ी पहल फिलहाल अनिश्चितता से घिरी हुई है।


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