Donald Trump Statement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका-इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई में एक ही हमले में ईरान के 48 नेताओं को मार गिराया गया। ट्रंप ने ऑपरेशन को बड़ी सफलता बताया। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि हमले के बाद अब ईरानी नेता उनसे बातचीत करना चाहते हैं। हम भी वार्ता के लिए सहमत हैं।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के 48 शीर्ष नेताओं को एक ही हमले में मार गिराया गया है। ट्रंप ने आगे यह भी कहा कि नए ईरानी नेता बातचीत करना चाहते हैं। उनको पहले ही वार्ता करनी चाहिए थी। अब बहुत देर हो चुकी है। आगे ट्रंप ने कहा कि वार्ता में देरी कर वो चालाकी करना चाह रहे थे। लेकिन अगर वो बात करने के लिए तैयार हैं, तो हम भी वार्ता करने के लिए सहमत है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ये बातचीत कब होगी।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के नौ नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर समुद्र में डुबो दिया है, जिनमें कुछ बड़े और महत्वपूर्ण जहाज भी शामिल थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के नौसैनिक मुख्यालय को काफी हद तक तबाह कर दिया गया है और अब बाकी बेड़े को निशाना बनाया जा रहा है।
ट्रंप ने क्या कहा और क्यों बढ़ी चर्चा?
ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि चल रहे सैन्य अभियान की सफलता पर खुद दुनिया को भरोसा नहीं हो रहा है। उनके मुताबिक एक ही कार्रवाई में 48 नेता खत्म हो गए और ऑपरेशन तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान तय समय से पहले आगे बढ़ रहा है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
क्या ईरान पर हमले ने बदला युद्ध का समीकरण?
ट्रंप का बयान उस समय आया है जब अमेरिका और इस्राइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी। इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य झटका माना जा रहा है। इन हमलों में सैन्य ठिकानों, सरकारी परिसरों और नेतृत्व से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरान की प्रतिक्रिया क्या रही?
हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरानी बलों ने पश्चिम एशिया के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी क्षेत्रों को निशाना बनाया। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण पूरे इलाके में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है और कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं।
माना जा रहा है कि ट्रंप के इस दावे से युद्ध और तेज हो सकता है। अमेरिका और इस्राइल पहले ही साफ कर चुके हैं कि सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक उनके लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। वहीं ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि वह जवाबी हमले जारी रखेगा। ऐसे में पश्चिम एशिया में बड़ा और लंबा संघर्ष होने की आशंका बढ़ गई है।