गाजा पर अमेरिकी और रूसी प्रस्तावों के टकराव ने संयुक्त राष्ट्र में तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिका अपने संशोधित प्रस्ताव के लिए समर्थन जुटा रहा है, जबकि रूस ट्रंप की अंतरिम सत्ता योजना हटाकर अपना मसौदा आगे बढ़ा रहा है। संघर्षविराम को स्थिर करने की कोशिशों के बीच कतर, मिस्र, यूएई, सऊदी समेत आठ देशों ने अमेरिकी प्रस्ताव को तुरंत अपनाने की अपील की है।
गाजा को लेकर अमेरिका और रूस के बीच खींचातानी बढ़ गई है। इस बात को ऐसे समझ सकते है कि अमेरिका ने गाजा पर अपने नए प्रस्ताव के लिए संयुक्त राष्ट्र में समर्थन जुटाने की कोशिश तेज कर दी है, जबकि रूस ने ट्रंप की प्रस्तावित अंतरिम सत्ता व्यवस्था को हटाकर अपना अलग मसौदा पेश कर दिया है। अहम बात ये है कि रूस के प्रस्ताव में उस ट्रांजशनल अथॉरिटी का जिक्र हटा दिया गया है जिसे अमेरिका के प्लान के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में बनाया जाना है।
ऐसे में अब उम्मीद लगाई जा रही है कि अगले हफ्ते अमेरिका और रूस दोनों के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वोटिंग होगी। एक यूएन राजनयिक के मुताबिक अमेरिकी प्रस्ताव को मनचाहे नौ वोट मिल सकते हैं, जबकि रूस और चीन संभवतः वीटो न लगाकर सिर्फ अमेरिकी प्रस्ताव के पक्ष नहीं रहेंगे।
अमेरिकी प्रस्ताव में क्या-क्या?
गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा यूएन में रखा गए प्रस्ताव संघर्षविराम के लिए लाए गए 20 बिंदुओं वाली योजना का समर्थन करता है। इस योजना में 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम की एक ट्रांजिशनल अथॉरिटी बनाने की बात है, जिसकी अगुवाई ट्रंप करेंगे। प्रस्ताव गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल को मंजूरी भी देगा, जो सीमाओं की निगरानी, सुरक्षा और गाज़ा को हथियारमुक्त करने जैसे काम करेगा।
हालांकि कई अरब देशों ने मामले में साफ-साफ कहा है कि वे तभी अभी सैनिक भेजेंगे जब ऐसा स्पष्ट और मजबूत जनादेश होगा। वहीं कुछ सदस्यों की आपत्ति के बाद, अमेरिका ने प्रस्ताव में यह भी जोड़ दिया है कि फलस्तीनी प्राधिकरण में सुधार और गाजा का पुनर्निर्माण आगे बढ़ने के बाद फलस्तीनी राज्य बनने का रास्ता खुल सकता है।