अमेरिकी सैन्य यूनिफॉर्म गाइडलाइंस 1981 के तहत धार्मिक प्रतीकों जैसे पगड़ी, दाढ़ी, हिजाब, और यरमुलकेस को प्रतिबंधित कर दिया गया था। यरमुलकेस, रूढ़िवादी यहूदी पुरुषों द्वारा सार्वजनिक रूप से पहना जाने वाला एक खोपड़ीनुमा प्रतीक होता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति आयोग ने देश के सैनिकों के लिए धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर समान नीति बनाने की सिफारिश की है। सैनिकों को पगड़ी पहनने, दाढ़ी रखने, हिजाब पहनने और यरमुलकेस जैसी धार्मिक आस्था की वस्तुओं के इस्तेमाल के इजाजत को लेकर लगातार मांग उठती रहती है। इसे देखते हुए यह सिफारिश अहम है। इसे स्वीकार किए जाने के बाद सभी अमेरिकी सैनिक अपनी धार्मिक आस्थाओं के मुताबिक इन प्रतीकों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
विज्ञापन
एशियाई अमेरिकियों, मूल हवाई लोगों और प्रशांत द्वीप समूह से संबंधित मामलों को लेकर राष्ट्रपति के सलाहकार आयोग ने शुक्रवार को अपनी आरंभिक रिपोर्ट जारी की। इसमें 12 मई को अनुमोदित सिफारिशों का विवरण दिया गया है। अमेरिकी सैन्य यूनिफॉर्म गाइडलाइंस 1981 के तहत धार्मिक प्रतीकों जैसे पगड़ी, दाढ़ी, हिजाब, और यरमुलकेस को प्रतिबंधित कर दिया गया था। यरमुलकेस (yarmulkes), रूढ़िवादी यहूदी पुरुषों द्वारा सार्वजनिक रूप से पहने जाने वाली एक खोपड़ीनुमा टोपी होती है।
अमेरिकी सेना और वायु सेना ने 2017 और 2020 में समान यूनिफॉर्म नीति को को बदल दिया था, ताकि धार्मिक आस्था की इन वस्तुओं की सैनिकों को इस्तेमाल की इजाजत दी जा सके। इसके बाद अमेरिकी सेना व वायुसेना के सैकड़ों जवान अपनी आस्था के अनुरूप चिंहों या प्रतीकों को पहन सकते हैं। लेकिन अमेरिकी नौसेना व नौसैनिकों को बहुत इस मामले में बहुत सीमित अधिकार हैं। इस कारण देश की सेवा के दौरान उन्हें अपनी धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन करना पड़ता है।
विज्ञापन
आयोग ने कहा कि अमेरिकी सेना में फिलहाल धार्मिक वस्तुओं के इस्तेमाल की प्रक्रिया और नीति एकसमान नहीं है। इसलिए इसे एकसमान बनाने की सिफारिश की गई है। इन सिफारिशों को अब राष्ट्रपति जो बाइडन को भेजा जाएगा। व्हाइट हाउस के अधिकारी इसे राष्ट्रपति को भेजने के पहले उसकी समीक्षा कर रहे हैं।