अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में आयोजित जी-7 सम्मेलन में उस वक्त हैरान रह गए जब वहां अचानक ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ आ गए। ये सम्मेलन फ्रांस के तटीय शहर बिआरित्ज में आयोजित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि रविवार को जरीफ के आने से विश्व नेताओं के बीच तनाव बढ़ सकता है।
ये भी कहा जा रहा है कि जरीफ यहां फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की पहल के चलते आए हैं। जो इस बार जी-7 सम्मेलन को होस्ट कर रहे हैं। इस बात की जानकारी एक वरिष्ठ यूरोपियन अधिकारी ने दी है। ईरान की ओर से आए मंत्री के आने की जानकारी बाकी नेताओं को भी नहीं थी।
अक्सर ट्रंप की बातों का जवाब देने के लिए विश्व नेताओं के पास शब्दों की कमी पड़ जाती है। लेकिन इस बार ट्रंप के पास ही शब्दों की कमी पड़ गई। जब उनसे इस बारे में पत्रकारों ने सवाल किया तो ट्रंप ने जवाब में कहा, "नो कमेंट्स"।
जरीफ के बारे में बताते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मौसवी ने ट्विटर पर कहा कि जरीफ उस रिसोर्ट टाउन में अपने फ्रांसीसी समकक्ष जीन-यवेस ले ड्रियान के आमंत्रण पर गए हैं। मौसवी ने कहा, यात्रा का उद्देश्य "ईरान और फ्रांस के राष्ट्रपतियों के बीच हाल की पहलों के बारे में चर्चा जारी रखना है।"
इसके अगले दिन यानि सोमवार को ट्रंप ने कहा कि ईरान के शीर्ष राजनयिक से मुलाकात करना जल्दबाजी होती। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वाशिंगटन ईरान में सत्ता परिवर्तन के बारे में नहीं सोच रहा है।
जानकारी के मुताबिक फ्रांस के तटीय शहर बिआरित्ज में सोमवार को जी-7 शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ है। इस सम्मेलन में जरीफ तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर राजनयिक गतिरोध के संबंध में चर्चा करने के लिए बिआरित्ज पहुंचे थे। जरीफ की यहां मौजूदगी अप्रत्याशित थी और यह फ्रांस की तरफ से ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव कम करने की कोशिश थी।
फ्रांस के राजनयिकों ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने ट्रंप से मुलाकात नहीं की लेकिन एक जगह दोनों नेताओं की मौजूदगी ने दोनों के बीच नरमी की उम्मीद पैदा कर दी। ट्रंप ने शिखर सम्मेलन में पत्रकारों से कहा, " मुझे लगता है कि उनसे मिलना जल्दबाजी होती।"
उन्होंने कहा कि उन्हें पता था कि जरीफ यहां पहुंच रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा, "हम सत्ता परिवर्तन के बारे में नहीं सोच रहे हैं।"