भारत पर पड़ सकता है नए टैरिफ का असर
ट्रंप के दवाओं के आयात पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले का भारत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर देश के दवा निर्माण उद्योग पर। बीते वित्त वर्ष में भारतीय उद्योगों की तरफ से दुनिया को करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये (27.9 अरब डॉलर) की दवाओं का निर्यात हुआ था। इसमें अमेरिका को ही करीब 77 हजार करोड़ रुपये (8.7 अरब डॉलर) की दवाएं निर्यात हुई थीं।
भारत के दवा निर्माताओं के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा है। 2025 के पहले छह महीनों में ही अमेरिका को कुल 32 हजार 505 करोड़ रुपये (3.7 अरब डॉलर) की दवाओं का निर्यात हो चुका है। ऐसे में 100 फीसदी टैरिफ लगने से अमेरिका में भारत की सस्ती दवाएं भी महंगी दरों पर बिकेंगी।
जिन कंपनियों पर इस टैरिफ का सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है, उनमें डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा, लुपिन समेत कई कंपनियां शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप के टैरिफ का सबसे ज्यादा असर ब्रांडेड या पेटेंट कराई हुई दवाओं पर पड़ने की आशंका है, हालांकि जेनेरिक दवाओं को लेकर भी संशय की स्थिति है।
अमेरिका में विनिर्माण संयंत्र बनाने वाली कंपनियों पर लागू नहीं होगा आयात कर
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि दवाइयों पर लगने वाले नए आयात कर उन कंपनियों पर लागू नहीं होंगे, जो अमेरिका में विनिर्माण संयंत्र बना रही हैं या निर्माण कार्य शुरू कर चुकी हैं। हालांकि, यह साफ नहीं है कि जिन कंपनियों के पहले से ही अमेरिका में कारखाने हैं, उन पर यह छूट लागू होगी या नहीं।
- जनगणना ब्यूरो के अनुसार, अमेरिका ने 2024 में करीब 233 अरब डॉलर की दवाइयां और औषधीय उत्पाद आयात किए थे। ऐसे में दवाओं की कीमत दोगुनी होने की आशंका से लोगों के स्वास्थ्य खर्च, मेडिकेयर और मेडिकेड योजनाओं पर भी बोझ बढ़ सकता है।