फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

US-Russia Meet: कितनी सफल रही ट्रंप-पुतिन की बैठक, यूक्रेन-भारत के लिए आगे क्या? पांच बिंदुओं में जानें

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 16 Aug 2025 04:32 PM IST

सार

ट्रंप और पुतिन की अलास्का में हुई बैठक का क्या नतीजा निकला है? दोनों नेताओं ने बैठक से निकलने के बाद बातचीत में प्रगति का दावा किया, हालांकि यह किस तरह की प्रगति रही? दोनों देशों के बीच किसी तरह का समझौता न होने के क्या मायने हैं? इसके अलावा भारत के खिलाफ रूस से तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त टैरिफ लगाने के अमेरिका के फैसले में आगे क्या होगा? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
विज्ञापन
डोनाल्ड ट्रंप, वोलोदिमीर जेलेंस्की, पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन। - फोटो : अमर उजाला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को अलास्का के एंकरेज में अहम बैठक में हिस्सा लिया। बीते 10 साल में यह पहली बार था, जब पुतिन ने किसी स्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका का दौरा किया। वहीं, किसी अमेरिकी राष्ट्रपति से यह उनकी चार साल बाद मुलाकात थी। रूस-यूक्रेन में संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिकी और रूसी राष्ट्रपति की इस पहली मुलाकात से पूरी दुनिया को काफी उम्मीदें भी थीं।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ट्रंप और पुतिन की अलास्का में हुई बैठक का क्या नतीजा निकला है? दोनों नेताओं ने बैठक से निकलने के बाद बातचीत में प्रगति का दावा किया, हालांकि यह किस तरह की प्रगति रही? दोनों देशों के बीच किसी तरह का समझौता न होने के क्या मायने हैं? इसके अलावा भारत के खिलाफ रूस से तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त टैरिफ लगाने के अमेरिका के फैसले में आगे क्या होगा? आइये जानते हैं...
विज्ञापन

डोनाल्ड ट्रंप, वोलोदिमीर जेलेंस्की, पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन। - फोटो : अमर उजाला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को अलास्का के एंकरेज में अहम बैठक में हिस्सा लिया। बीते 10 साल में यह पहली बार था, जब पुतिन ने किसी स्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका का दौरा किया। वहीं, किसी अमेरिकी राष्ट्रपति से यह उनकी चार साल बाद मुलाकात थी। रूस-यूक्रेन में संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिकी और रूसी राष्ट्रपति की इस पहली मुलाकात से पूरी दुनिया को काफी उम्मीदें भी थीं।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ट्रंप और पुतिन की अलास्का में हुई बैठक का क्या नतीजा निकला है? दोनों नेताओं ने बैठक से निकलने के बाद बातचीत में प्रगति का दावा किया, हालांकि यह किस तरह की प्रगति रही? दोनों देशों के बीच किसी तरह का समझौता न होने के क्या मायने हैं? इसके अलावा भारत के खिलाफ रूस से तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त टैरिफ लगाने के अमेरिका के फैसले में आगे क्या होगा? आइये जानते हैं...

पहले जानें- क्या निकला ट्रंप-पुतिन की बैठक का नतीजा?
अलास्का में शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन का रेड कार्पेट पर स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच अच्छी केमिस्ट्री देखने को मिली। पुतिन ने ट्रंप की खास 'बीस्ट' कार में कार्यक्रम स्थल तक का सफर किया। इसके बाद दोनों ने बंद दरवाजों के पीछे अपने सलाहकारों और विदेश मंत्रियों के साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष पर करीब तीन घंटे तक चर्चा की। गौरतलब है कि पहले यह बैठक सिर्फ ट्रंप और पुतिन के बीच ही होनी थी। 

चौंकाने वाली बात यह है कि जब अलास्का में ट्रंप-पुतिन की बैठक चल रही थी, तब भी यूक्रेन से ऐसी खबरें आ रही थीं कि रूस उस पर ड्रोन्स और हवाई हमले कर रहा है।

ट्रंप-पुतिन की बंद दरवाजे के पीछे बैठक में क्या हुआ?
  • दोनों नेताओं के बीच करीब तीन घंटे तक वार्ता हुई। हालांकि, इसमें रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में संघर्ष विराम लागू करने पर सहमति नहीं बनी।
  • ट्रंप-पुतिन ने बैठक के बाद कहा कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन न तो ट्रंप और न ही पुतिन और उनके अधिकारियों ने इसका ब्योरा दिया।

अलास्का बैठक से पुतिन को क्या फायदा?
एंकरेज में भले ही ट्रंप और पुतिन के बीच यूक्रेन में शांति स्थापित करने पर सहमति न बनी हो, लेकिन इसे पुतिन के लिए कई पहलुओं पर जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
  1. अमेरिका में पुतिन की वापसी अपने आप में एक जीत के तौर पर देखी जा रही है। खासकर जिस तरह ट्रंप ने रेड कार्पेट पर उनका स्वागत किया। वह भी ऐसे समय में जब पश्चिमी देशों ने रूस को यूक्रेन से युद्ध के लिए अलग-थलग करने का फैसला किया है। 
  2. पुतिन ने बिना रूस के लिए किसी नकारात्मक समझौते के ही अलास्का छोड़ दिया। बल्कि इस दौरान रूसी राष्ट्रपति ने ट्रंप के साथ अपनी करीबी को ज्यादा दर्शाया। राजनीतिक हलकों में ट्रंप खुद कई बार जिक्र कर चुके हैं कि पुतिन उन्हें जबरदस्त सम्मान देते हैं।
  3. रूसी राष्ट्रपति ने न सिर्फ यूक्रेन में शांति के लिए ट्रंप की तारीफ की, बल्कि यूरोप को उसकी हरकतों के लिए ट्रंप के सामने ही डपट दिया। इस घटना के बाद रूस में पुतिन की छवि और सकारात्मक होने का अनुमान है। 
  4. पुतिन ने अलास्का में ट्रंप के साथ उनकी कार में सफर कर भरोसे और दोस्ती के मुद्दे पर यूरोप और यूक्रेन के नेताओं को कड़ा संदेश दिया। इसे यूक्रेन और यूरोप की पुतिन के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिशों को झटका माना गया।

ट्रंप को किस तरह बैठक से राजनीतिक लाभ?
  1. डोनाल्ड ट्रंप ने अलास्का बैठक से पहले ही कहा था कि अगर उन्हें सम्मेलन में कुछ अच्छा सुनने को नहीं मिला तो वे इसे तुरंत छोड़ देंगे। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच करीब तीन घंटे तक वार्ता चली, जिससे संदेश गया कि पुतिन और ट्रंप दोनों ने ही यूक्रेन में शांति के लिए गंभीरता से बात की। 
  2. ट्रंप को इस बैठक के बाद अपने उन दावों को भी साबित करने का मौका मिल गया, जिसके तहत वह यूरोप और यूक्रेन के बाकी नेताओं के मुकाबले पुतिन को ज्यादा आसानी से बातचीत की मेज तक लाने का दावा करते हैं। 
  3. रूस-अमेरिका के बीच यूक्रेन के मुद्दे पर सहमति न बनने के बावजूद पुतिन का यह कहना कि दोनों देश कई मुद्दों को लेकर सहमत हैं, से ट्रंप अब पुतिन से आगे की बैठकों को गंभीर कोशिशों के तौर पर प्रोजेक्ट कर सकते हैं। 
  4. इस बीच पुतिन की तरफ से ट्रंप को अगली बैठक के लिए मॉस्को आने का न्योता भी कूटनीतिक स्तर पर ट्रंप के लिए जीत की तरह है। गौरतलब है कि 2013 में जी20 बैठक के लिए ओबामा के सेंट पीटर्सबर्ग जाने के बाद से कोई अमेरिकी नेता रूस नहीं गया है।
Alaska Meeting: यूक्रेन में सीजफायर पर रूस-अमेरिका ने क्या बात की? ट्रंप-पुतिन की इन तस्वीरों से मिले कई संकेत

यूक्रेन और जेलेंस्की के लिए इस बैठक के क्या मायने?
अलास्का में यह बैठक भले ही रूस और यूक्रेन के बीच हो रही थी, लेकिन इसमें यूक्रेन का भविष्य दांव पर लगा था। खासकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का। ट्रंप ने बैठक से पहले ही कहा था कि बातचीत के बाद वे सबसे पहले जेलेंस्की और उसके बाद नाटो नेताओं को इसकी जानकारी देंगे।
  • ट्रंप और पुतिन के बीच यूक्रेन पर कोई समझौता न होने के बाद अब जेलेंस्की को समय मिल गया है कि वे पुतिन की तरफ से की गई पेशकश पर विचार कर सकें और यूरोपीय नेताओं के साथ जंग को लेकर आगे की योजना तैयार कर सकें। 
  • हालांकि, पुतिन की तरफ से अगली बैठक के लिए मॉस्कों में सिर्फ ट्रंप को न्योता देना भी जेलेंस्की के लिए चिंता में डालने वाला है, क्योंकि अपने भविष्य को लेकर होने वाली बैठक में उनकी गैरमौजूदगी यूक्रेन के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।

 बैठक बेनतीजा रहने का भारत पर क्या असर?
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनकी तरफ से भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ का असर देखने को मिला है और पुतिन इसी वजह से उनके साथ बैठक के लिए तैयार हुए हैं।
  • ट्रंप के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट न्यूज इंटरव्यू में चेतावनी दे चुके हैं कि अगर पुतिन और ट्रंप की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलता है तो भारत को ज्यादा टैरिफ के लिए तैयार रहना चाहिए।
  • ऐसे में अलास्का बैठक के बाद भारत का अपने सबसे बड़े निर्यात केंद्र (अमेरिका) से आगे भी व्यापार में संघर्ष जारी रह सकता है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर मुझे भारत पर और टैरिफ लगाने पड़े तो मैं जरूर करूंगा, लेकिन हो सकता है कि मुझे ऐसा करने की जरूरत न पड़े।'
Donald Trump: 'रूस, भारत के रूप में अपना एक बड़ा तेल ग्राहक खो चुका है', टैरिफ धमकियों के बीच बोले ट्रंप
और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next