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Crude oil Crisis: रूस से तेल खरीद पर पश्चिमी देशों को भारत के रुख का इंतजार, इस बीच बाइडन ने की बड़ी घोषणा

Thu, 20 Oct 2022 05:58 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

दुनिया की सात सबसे अमीर अर्थव्यवस्थाओं के समूह (जी-7) पांच दिसंबर तक रूसी तेल निर्यात पर एक मूल्य-कैपिंग तंत्र को लागू करने की कोशिश कर रहा है। यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल के समुद्री आयात पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है।
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कच्चा तेल (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत ने बुधवार को कहा कि वो पश्चिमी देशों के उस प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है जिसमें रूसी तेल की खरीद की सीमा तय करने को कहा गया है। हालांकि कई लोकल तेल रिफाइनरी अभी से रूसी तेल खरीदने के लिए कतारबद्ध हो गई हैं। अब दुविधा ये है कि इस रूसी तेल की खेप पांच दिसंबर के बाद भारत आनी शुरू होगी, जब तेल खरीद की सीमा वाला प्रतिबंध प्रभाव में आ चुका होगा।

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दुनिया की सात सबसे अमीर अर्थव्यवस्थाओं के समूह (जी-7) पांच दिसंबर तक रूसी तेल निर्यात पर एक मूल्य-कैपिंग तंत्र को लागू करने की कोशिश कर रहा है। यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल के समुद्री आयात पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है। जब भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से रूसी तेल के लिए निर्धारित मूल्य सीमा का पालन करने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सखालिन से तेल लेने पर जापान को छूट है और पाइपलाइन के माध्यम से आने वाले कच्चे तेल पर भी रोक नहीं है। हमें इसे देखना होगा।

चीन के बाद भारत रूस के दूसरे सबसे बड़े तेल ग्राहक के रूप में उभरा है क्योंकि कुछ पश्चिमी देशों ने यूक्रेन पर फरवरी के अंत में आक्रमण के बाद मास्को से तेल खरीद पर रोक लगा दी थी। रूस के तेल राजस्व पर अंकुश लगाने की योजना कितनी प्रभावी होगी इसके लिए पूरी दुनिया नई दिल्ली के रुख का इंतजार कर रही है। मास्को ने कहा है कि वह किसी भी ऐसे देश को तेल की आपूर्ति नहीं करेगा जो मूल्य सीमा से सहमत है।
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तेल कंपनियां सतर्क
इस पूरी कवायद के बीच भारत की तेल कंपनियां फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं। कंपनी सूत्रों ने एजेंसी को बताया है कि भारत की शीर्ष रिफाइनरी इंडियन ऑयल कॉर्प को पांच दिसंबर के बाद रूसी तेल के 3-4 कार्गो की डिलीवरी होनी है। जबकि भारत पेट्रोलियम कॉर्प दिसंबर में डिलीवरी के लिए कार्गो को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि हमें डिलीवरी के आधार पर रूसी तेल मिलता है, जब मूल्य सीमा तंत्र की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा हम उसके बाद निर्णय लेंगे।

बीपीसीएल और आईओसी ने फिलहाल इस मामले पर टिप्पणी नहीं की है। हालांकि सूत्रों ने कहा है कि भारतीय कंपनियों के पास दिसंबर में अधिक रूसी तेल कार्गो डिलीवरी के लिए अनुरोध करने को लेकर कम से कम अक्तूबर के अंत तक का समय है।

क्योंकि रूसी तेल की थोक खरीद स्पॉट अनुबंधों के माध्यम से की जाती है। उन्होंने कहा कि कंपनियां हालांकि भुगतान शर्तों, बीमा और शिपिंग जैसे मुद्दों पर स्पष्टता का इंतजार कर रही हैं। भारतीय की सरकारी रिफाइनरी में से एक के अधिकारी ने कहा कि पांच दिसंबर एक बाधा नहीं है, हम आवश्यकता के अनुसार और व्यावहारिक वाणिज्यिक प्रस्तावों के आधार पर काम जारी रखते हैं। एक अन्य सूत्र ने कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल खरीद को रोकने से भारी ऊर्जा असंतुलन पैदा होगा, जो कुछ अर्थव्यवस्थाएं बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी। उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए परेशानी का सबब होगा इसलिए मुझे यकीन है कि अगले कुछ दिनों में इसका समाधान निकल आएगा।

बाइडन ने रणनीतिक तेल भंडार से 15 मिलियन बैरल तेल छोड़ने की घोषणा की
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार से 15 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है। यह घोषणा ओपेक प्लस देशों द्वारा घोषित हालिया उत्पादन कटौती की प्रतिक्रिया का हिस्सा है। बाइडन ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान संवाददाताओं से कहा कि "आज की मेरी घोषणा के साथ, हम ऐसे समय में बाजारों को स्थिर करना और कीमतों में कमी करना जारी रखेंगे, जब अन्य देशों की कार्रवाई ने इस तरह की अस्थिरता पैदा की है।"

बाइडन ने कहा कि दिसंबर में 15 मिलियन बैरल की डिलीवरी की जानी है। बाइडन प्रशासन ने इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रिकल ग्रिड के लिए बैटरी के घरेलू निर्माण क्षमता का विस्तार करने के लिए 2.8 बिलियन अमेरिकी डालर के अनुदान की भी घोषणा की। अपनी टिप्पणी के दौरान, बाइडन ने चीन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चीन ने बैटरी घटकों और महत्वपूर्ण सामग्री पर लगभग आधे वैश्विक उत्पादन को नियंत्रित किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी तकनीक बेहतर है।

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