फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

करीब 99 लाख हो जाएगा H-1B वीजा शुल्क: अमेरिका कर रहा तैयारी, भारतीयों पर पड़ेगा बड़ा असर

Mon, 24 Aug 2026 08:45 PM IST
Devesh Tripathi वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा और F-1 OPT कार्यक्रमों को महंगा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत H-1B से जुड़ा शुल्क 1,03,265 डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि OPT आवेदनों पर भी भारी फीस लगाने की संभावना जताई गई है। इन योजनाओं का असर भारतीय पेशेवरों पर खास तौर पर पड़ सकता है।
विज्ञापन
एच1बी वीजा शुल्क - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन एच-1बी (H-1B) वीजा और F-1 ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रमों के लिए नए शुल्क लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत H-1B वीजा शुल्क को बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर यानी 98.92 लाख भारतीय रुपये किए जाने का प्रस्ताव है।
विज्ञापन


अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएसएस) ने यह प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे सोमवार को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया गया। पिछले साल भी ऐसा शुल्क लगाया गया था, लेकिन अदालतों ने इसे रोक दिया था। प्रस्तावित नियम लागू होने पर अमेरिका में विदेशी नागरिकों के काम करने, विश्वविद्यालय से नौकरी की ओर बढ़ने वाले छात्रों और H-1B कर्मचारियों को प्रायोजित करने वाले नियोक्ताओं की लागत बढ़ सकती है।

पहले एच-1बी वीजा पर लगता था कितना शुल्क?
एच-1बी कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। इसके तहत हर साल 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं। इसके अलावा उच्च डिग्री वाले कर्मचारियों के लिए 20,000 वीजा उपलब्ध हैं। इन वीजा को तीन से छह साल के लिए मंजूरी दी जाती है।
विज्ञापन


पिछले साल ट्रंप के आदेश के बाद कुछ H-1B वीजा हासिल करने की लागत काफी बढ़ गई थी। इससे पहले विभिन्न परिस्थितियों के आधार पर इन वीजा के लिए आमतौर पर करीब 2,000 से 5,000 डॉलर तक शुल्क देना पड़ता था।

भारतीयों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
प्रस्तावित बदलाव का भारतीयों पर खास असर पड़ सकता है। H-1B वीजा हासिल करने वालों में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय हैं। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने 2024 में 3,99,402 H-1B याचिकाओं को मंजूरी दी थी। इनमें भारतीय मूल के लाभार्थियों की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत थी। हाल के अनुमानों के मुताबिक, अमेरिकी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर अमेरिका में भारतीय मूल के 52 लाख से अधिक लोग रहते हैं।

ये प्रस्ताव पहले ही व्हाइट हाउस के प्रबंधन एवं बजट कार्यालय (OMB) तक पहुंच चुके हैं। OPT शुल्क से संबंधित प्रस्तावित नियम 20 अगस्त को OMB को भेजा गया था और इसकी समीक्षा चल रही है। वहीं, कुछ H-1B याचिकाओं पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी OMB को भेजा गया था और उसकी समीक्षा 19 अगस्त को पूरी हो गई थी।

ओपीटी आवेदनों पर कितना शुल्क?
फ्रैगोमेन के अनुसार, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग OPT आवेदनों पर 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाने का प्रस्ताव कर सकता है। प्रस्तावित H-1B शुल्क प्रशासन की ओर से पहले लगाए गए 1 लाख डॉलर के H-1B याचिका शुल्क को लेकर चल रहे मुकदमे से भी जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इन प्रस्तावों का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। इन्हें बाद में आधिकारिक तौर पर जारी किया जाएगा।

एच-1बी वीजा शुल्क को लेकर कानूनी चुनौती
अमेरिका के सबसे बड़े कारोबारी लॉबिंग संगठन यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स, डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों और यूनियनों तथा नियोक्ताओं के एक गठबंधन ने इस शुल्क को अदालत में चुनौती दी है। याचिकाओं में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति को प्रवेश प्रतिबंधित करने की मिली शक्ति उन्हें उस कानून को बदलने का अधिकार नहीं देती, जिसके तहत H-1B वीजा कार्यक्रम बनाया गया है।

मुकदमा दायर करने वाले राज्यों और संगठनों का यह भी कहना है कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग कांग्रेस की अनुमति के बिना अमेरिका के लिए शुल्क, कर या राजस्व जुटाने के अन्य तरीके लागू नहीं कर सकता। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह शुल्क पारंपरिक कर नहीं है और देश में प्रवेश को प्रतिबंधित करने के राष्ट्रपति के अधिकार की समीक्षा करने का अदालतों के पास सीमित अधिकार है।

60 दिन की राहत भी हो सकती है खत्म
नए शुल्क के प्रस्ताव के अलावा, डीएचएस ने इसी महीने की शुरुआत में बेरोजगार H-1B कर्मचारियों के लिए मौजूदा 60 दिन की ग्रेस अवधि खत्म करने का प्रस्ताव भी रखा था। अगर इस नियम को अंतिम रूप दिया जाता है तो ऐसे कर्मचारियों को तुरंत अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। अन्यथा उन्हें अपने आव्रजन दर्जे के उल्लंघन का सामना करना पड़ सकता है।

इस बदलाव से प्रभावित कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भी लगभग तुरंत अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। मौजूदा व्यवस्था में उन मामलों में 60 दिन की ग्रेस अवधि मिलती है, जब आव्रजन दर्जे का आधार बनी नौकरी अधिकृत प्रवास अवधि खत्म होने से पहले समाप्त हो जाती है। नियम अंतिम रूप लेता है तो कुछ कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए यह सुविधा खत्म हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें