भारत और चीन की सेना(फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया है कि सीमा पर बढ़ती चीन की चुनौती को देखते हुए भारत, अमेरिका के साथ मिलकर लंबी दूरी की तोपों और युद्धक वाहनों का निर्माण करेगा। बता दें कि बीते तीन सालों से भारत और चीन के सैनिक लद्दाख सीमा पर आमने-सामने हैं। ऐसे में अपनी परिचालन जरूरतों को देखते हुए भारत, अमेरिका के साथ मिलकर लंबी दूरी की तोपों और युद्धक वाहनों के निर्माण की तैयारी कर रहा है।
अमेरिकी संसद में उठा चीन मामला
बता दें कि हिंद प्रशांत मामलों के रक्षा उप-सचिव एली रैटनर ने अमेरिकी संसद को चीन मामले पर जानकारी देते हुए यह जानकारी दी। रैटनर ने कहा कि बाइडन प्रशासन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर हिंद प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को पुख्ता करने में जुटा है। अमेरिकी संसद में चीन को लेकर यह सुनवाई ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और चीन के संबंधों में ताइवान और मानवाधिकार के मुद्दे पर तनाव गहराया हुआ है।
चीन से निपटने की पूरी तैयारी कर रहा अमेरिका
रैटनर ने कहा कि पेंटागन जापान की हमले का जवाब देने की क्षमता को वापस पाने में मदद कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर मिसाइलों और हथियारों की निर्माण क्षमता को विकसित कर रहा है। भारत के साथ मिलकर रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-निर्माण कर रहा है। साथ ही दक्षिण एशियाई देशों को चीन के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मजबूत कर रहा है। रैटनर ने कहा कि हम अपने भारतीय सहयोगियों के साथ लंबी दूरी की तोपों और युद्धक वाहनों के सह-निर्माण की दिशा में भी काम कर रहे हैं।
भारत-चीन के रिश्तों में तनाव जारी
भारत और चीन के बीत जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हिंसक झड़प भी हुई थी। इस झड़प में भारत के 20 से ज्यादा सैनिक बलिदान हो गए थे। चीन को भी इसमें भारी नुकसान हुआ था लेकिन उसने सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं किया है। बीते दो दशकों में दोनों देशों के बीच हुई यह सबसे गंभीर झड़प थी। भारत भी साफ कर चुका है कि सीमा पर शांति हुए बिना चीन से बातचीत नहीं हो सकती।