अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने बुधवार को केवल रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन से 95 अरब डॉलर के बजट प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस पैकेज का उद्देश्य ईरान के खिलाफ जारी युद्ध, रक्षा खर्च और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अन्य प्रमुख प्राथमिकताओं के लिए धन उपलब्ध कराना है। हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसका कड़ा विरोध किया, वहीं कुछ रिपब्लिकन सांसद भी इसके पक्ष में नहीं थे। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले इस प्रस्ताव को ट्रंप के एजेंडे को आगे बढ़ाने की बड़ी कोशिश माना जा रहा है।
आखिर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही विरोध क्यों हुआ?
रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसद इस योजना को लेकर असहज दिखे। पार्टी के कट्टरपंथी धड़े को इस बात पर आपत्ति थी कि प्रस्ताव में खर्च की भरपाई के लिए किसी तरह की बजट कटौती का प्रावधान नहीं किया गया है। इसके बावजूद हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने इसे आगे बढ़ाया। उनका मानना है कि विभाजित कांग्रेस में ट्रंप की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का फिलहाल यही सबसे प्रभावी तरीका है, हालांकि सीनेट में इसे लेकर संशय बना हुआ है।
मतदान का नतीजा क्या रहा और किसने क्या कहा?
प्रस्ताव 216-214 मतों से पारित हुआ। सभी डेमोक्रेट सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। हाउस बजट समिति के अध्यक्ष और टेक्सास से रिपब्लिकन सांसद जोडी एरिंगटन ने कहा कि मिशन पूरा करने के लिए हमें गोलियां और बम चाहिए।
डेमोक्रेट्स ने इस पैकेज का विरोध किस आधार पर किया?
डेमोक्रेटिक नेताओं का कहना है कि अरबों डॉलर युद्ध पर खर्च करने के बजाय अमेरिका के भीतर महंगाई कम करने और आम नागरिकों की मदद पर खर्च किए जाने चाहिए। कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट सांसद और हाउस डेमोक्रेटिक कॉकस के अध्यक्ष पीट एगुइलार ने कहा कि रिपब्लिकन ट्रंप के असफल ईरान युद्ध पर अरबों डॉलर खर्च करना चाहते हैं, जबकि यही संसाधन अमेरिकी जनता के हित में लगाए जा सकते हैं।
ईरान युद्ध को लेकर कांग्रेस में गतिरोध क्यों है?
अमेरिकी कांग्रेस इस समय ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर गहरे राजनीतिक गतिरोध का सामना कर रही है। कांग्रेस न तो ट्रंप की सैन्य कार्रवाई रोक पा रही है और न ही उसने आधिकारिक रूप से अमेरिकी सैन्य बल के इस्तेमाल की मंजूरी दी है। हाल ही में आए AP-NORC सर्वेक्षण के अनुसार अधिकांश अमेरिकी नागरिक ट्रंप की ईरान नीति से सहमत नहीं हैं।
रक्षा बजट पर दबाव कितना बढ़ गया है?
यह बजट बहस ऐसे समय हो रही है जब ट्रंप मध्य-पूर्व में शहीद हुए चार अमेरिकी सैनिकों के सम्मान समारोह में शामिल हुए। इसके साथ ही इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौतों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सप्ताह सीनेट की सुनवाई में कहा कि पिछले वर्ष रक्षा बजट में 150 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि मिलने के बावजूद अब पेंटागन के पास धन की कमी होने लगी है।
किस मद के लिए कितना पैसा रखा गया है?
इस प्रस्ताव में 60 अरब डॉलर पेंटागन के लिए, 13 अरब डॉलर अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के लिए, 12 अरब डॉलर ट्रंप के टैरिफ से प्रभावित किसानों की सहायता के लिए और 10 अरब डॉलर मतदान कानूनों में बदलाव के लिए रखे गए हैं। इसमें SAVE America Act के तहत मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं, जिन्हें ट्रंप अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनते हैं।
बजट रिकंसिलिएशन प्रक्रिया आखिर है क्या?
रिपब्लिकन इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए बजट रिकंसिलिएशन प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में साधारण बहुमत से बिल पारित कराया जा सकता है और सीनेट में फिलिबस्टर के जरिए इसे लंबे समय तक रोके जाने की संभावना कम हो जाती है। पहले इसका इस्तेमाल कम होता था, लेकिन अब विभाजित कांग्रेस में यह रिपब्लिकन नेतृत्व का पसंदीदा हथियार बन चुका है।
रिपब्लिकन नेता इस प्रक्रिया को क्यों जरूरी बता रहे हैं?
अलबामा से रिपब्लिकन सांसद और हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माइक रोजर्स ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सेना को तैयार रखना, सैनिकों का वेतन सुनिश्चित करना और देश की सुरक्षा बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसलिए इस फंडिंग को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
डेमोक्रेटिक नेतृत्व ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
हाउस में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज़ ने आरोप लगाया कि रिपब्लिकन प्रशासन ने भूखे बच्चों, बुजुर्गों और पूर्व सैनिकों के मुंह से भोजन छीनकर ट्रंप के युद्ध अभियान को वित्तीय मदद देने का रास्ता चुना है।
रिपब्लिकन सांसद केविन काइली ने विरोध क्यों किया?
कैलिफोर्निया के सांसद केविन काइली, जो पहले रिपब्लिकन थे और अब निर्दलीय हैं, ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना था कि युद्ध के लिए फंडिंग का फैसला दोनों दलों की सहमति से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की भूमिका युद्ध समाप्त कराने की दिशा में कहीं अधिक सक्रिय होनी चाहिए, लेकिन इस प्रस्ताव में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
आगे इस प्रस्ताव की राह कितनी कठिन है?
यह तीसरी बार है जब रिपब्लिकन नेतृत्व ने रिकंसिलिएशन प्रक्रिया का सहारा लिया है, जिसे वे रिकंसिलिएशन 3.0 कह रहे हैं। यदि हाउस से पारित प्रस्ताव सीनेट पहुंचता है तो वहां लंबी बहस और संशोधनों का दौर चलेगा। माइक जॉनसन चाहते हैं कि विभिन्न संसदीय समितियां गर्मियों तक अंतिम विधेयक तैयार करें और अगस्त अवकाश के बाद इस पर अंतिम मतदान कराया जाए।
सीनेट में इस प्रस्ताव को लेकर क्या स्थिति है?
सीनेट के बहुमत नेता जॉन थ्यून ने अभी तक इस प्रस्ताव पर स्पष्ट समर्थन नहीं दिया है। उनकी पार्टी के भीतर भी मतभेद हैं। कुछ रिपब्लिकन रक्षा खर्च और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य चाहते हैं कि अतिरिक्त खर्च की भरपाई बजट कटौती से की जाए।
सरकार बंद होने का खतरा क्यों मंडरा रहा है?
जॉन थ्यून की प्राथमिकता फिलहाल संभावित सरकारी शटडाउन को टालना है। वह चाहते हैं कि संसद गर्मी की छुट्टियों से पहले एक कंटीन्यूइंग रिजॉल्यूशन पारित कर दे ताकि नियमित सरकारी खर्च जारी रह सके। यदि ऐसा नहीं हो पाता तो सितंबर के अंत में मौजूदा फंड खत्म होने से पहले हाउस के इसी बजट प्रस्ताव का इस्तेमाल वैकल्पिक रास्ते के रूप में किया जा सकता है।
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सेव अमेरिका एक्ट पर भी क्यों है विवाद?
जॉन थ्यून का ट्रंप से सेव अमेरिका एक्ट को लेकर भी मतभेद है। इस कानून में मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। ट्रंप समर्थकों के बीच यह काफी लोकप्रिय है, लेकिन सीनेट में इसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में पहले से ही गैर-नागरिकों के लिए संघीय चुनाव में मतदान करना अवैध है। नए नियम लागू होने पर पात्र नागरिकों के लिए भी मतदान करना मुश्किल हो सकता है। अनुमान है कि मतदान आयु के करीब 9 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक, यानी लगभग 2.13 करोड़ लोग, के पास नागरिकता का प्रमाण तुरंत उपलब्ध नहीं है। वहीं लगभग आधे अमेरिकियों के पास अमेरिकी पासपोर्ट भी नहीं है।