अमेरिका में सरकारी अधिकारी उन शिकायतों की जांच कर रहे हैं जिनमें कहा गया है कि शरण मांगने के दौरान मेक्सिको सीमा पर सीमा पुलिस एजेंटों ने सिख प्रवासियों की पगड़ी जब्त कर ली थी। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन ऑफ एरिजोना ने सोमवार को अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा आयुक्त क्रिस मैग्नस को एक पत्र भेजा है, जिसमें कहा गया था कि संगठन ने जून के बाद से लगभग 50 मामलों का दस्तावेजीकरण किया है, जिसमें एजेंटों ने पगड़ी जब्त की, जो कि गंभीर धार्मिक-स्वतंत्रता का उल्लंघन है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सीबीपी आयुक्त क्रिस मैग्नस ने बुधवार को कहा कि उनका कार्यालय मामले को गंभीरता से ले रहा है।
पगड़ी मामले में आंतरिक जांच का आदेश
इस मामले पर बात करते हुए मैग्नस ने खुलासा किया कि इसे लेकर एक आंतरिक जांच बिठाई गई है। सीबीपी कर्मचारियों से उनकी अपेक्षा सभी प्रवासियों के साथ सम्मान से पेश आने की है। विशेष रूप से भारत के अधिकांश प्रवासी सिख हैं, शायद पंजाब क्षेत्र से जो एसीएलयू के एक पत्र के अनुसार धार्मिक स्वतंत्रता की तलाश में अमेरिका आते हैं। सिख धर्म दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा संगठित धर्म है। दुनिया भर में लगभग 30 मिलियन (तीन करोड़) सिख हैं और अमेरिका में 500,000 से अधिक सिख रहते हैं।
एसीएलयू ने द वॉशिंगटन पोस्ट के हवाले से कहा, कई सिख अपने धर्म की मान्यताओं के लिए अपनी प्रतिबद्धता की याद दिलाने के लिए बाहरी वर्दी पहनते हैं। जब कोई सिख पगड़ी बांधता है, तो पगड़ी सिर्फ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं रह जाती है बल्कि सिख के सिर के साथ एक हो जाती है। यह एक धार्मिक प्रतिबद्धता है जिसके बिना कई खुद को सिख महसूस नहीं करते। एजेंसी के युमा सेक्टर में सीबीपी अधिकारियों ने हाल के महीनों में भारत सहित दुनिया भर के देशों से शरण चाहने वालों की ऐतिहासिक आमद देखी है।
2022 में 10 हजार भारतीय नागरिकों को हिरासत में लिया गया
वित्त वर्ष 2022 के दौरान युमा में एजेंटों द्वारा लगभग 10,000 भारतीय नागरिकों को हिरासत में लिया गया है, जो कि 1 अक्टूबर से शुरू हुआ था। नवीनतम सीबीपी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021 के दौरान यह आंकड़ा 1,834 था। जब भी प्रवासियों को सीबीपी हिरासत में लिया जाता है, तो वे उन्हें बैकपैक, भोजन या अतिरिक्त कपड़ों जैसी व्यक्तिगत सामान को छोड़ने के लिए कहा जाता है। एजेंट उन्हें अपने जूतों के फीते हटाने को भीकहते हैं, जिसे हिरासत में लिए गए प्रवासियों की सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है।