मिस्र की स्वेज नहर में फंसा विशालकाय मालवाहक जहाज
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मिस्र की स्वेज नहर में मंगलवार को फंसा विशालकाय मालवाहक जहाज अब भी 25 भारतीय चालक दल के साथ वहीं फंसा हुआ है। हालांकि सभी भारतीय सुरक्षित हैं लेकिन जहाज की कंपनी ने कहा है कि अब शनिवार को समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों के कम होने के बाद एक बार फिर इसे निकालने की कोशिश की जाएगी। इस बीच, अमेरिका ने भी मदद की पेशकश की है।
जापानी कंपनी शोइ किसेन केके का ‘द एवर गिवन’ जहाज स्वेज शहर के पास नहर में फंस गया था, जिससे अभी भी अंतरराष्ट्रीय जहाजों का यातायात सुचारू नहीं हो पाया है। यह जलमार्ग वैश्विक परिवहन के लिए अहम है। इससे पहले शुक्रवार को नहर का रास्ता खुलवाने के सभी प्रयास नाकाम रहे। जहाज के तकनीकी प्रबंधक बर्नहार्ड शुल्त ने कहा, पोत के अंदर से पानी बाहर निकालने तथा और नौकाओं को बुलाकर पोत को हटना की कोशिशें की जा रही हैं।
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अधिकारी ने बताया कि जब समुद्री लहरें (हाई टाइड) कम हो जाएंगी तो उनकी योजना दोबारा कोशिश करने की है। इस बीच, व्हाइट हाउस ने नहर खोलने के लिए मिस्र को मदद की पेशकश की है। राष्ट्रपति बाइडन ने कहा, हमारे पास ऐसे उपकरण और क्षमताएं हैं जो अधिकतर देशों के पास नहीं हैं और हम देख रहे हैं कि हम क्या मदद कर सकते हैं और क्या मदद की जा सकती है।
कंटेनर हटाने पर भी विचार
शोइ किसेन ने शनिवार को एक बयान में कहा कि कंपनी ने जहाज का भार कम करने के लिए उसके कंटेनरों को हटाने पर विचार किया है, लेकिन यह बहुत मुश्किल अभियान है। लेकिन यदि जहाज को बाहर निकालने की हर कोशिशें विफल हो जाती है तो वह इस विकल्प पर विचार कर सकती है।
हर घंटे 29 अरब रुपये का नुकसान
दुनिया में व्यापार का सबसे बड़ा आधार जलमार्ग है। तीन दिनों से इस जहाज को निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पीछे से आने वाले जहाजों की लाइन बनती जा रही है। एक अनुमान के अनुसार वैश्विक व्यापार को हर घंटे 29 अरब रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। जहाजों को लंबा रास्ता चुनना पड़ रहा है और उन्हें पांच से छह दिन ज्यादा समय यात्रा में देना पड़ रहा है।