नेपाल में अमेरिका के साथ सैन्य गठजोड़ का मुद्दा अब बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो गया है। इस बारे में पूछताछ के लिए नेपाली संसद के निचले सदन- प्रतिनिधि सभा की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को रविवार को बुलाया था। लेकिन देउबा ने पहले से तय कार्यक्रम में व्यस्त होने की बात कह कर उसके सामने पेश होने से इनकार कर दिया। उसके बाद अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति के अलग-अलग दलों के सदस्यों के बीच इसको लेकर तीखी तू-तू-मैं-मैं हुई कि अब देउबा के बारे में क्या रुख लिया जाए।
देउबा के समिति के सामने न आने के बाद उनके एक सहयोगी ने मीडिया को बताया कि समिति ने बिना प्रधानमंत्री के तय कार्यक्रमों पर गौर किए उन्हें नोटिस भेज दिया था। संसदीय समिति में भी इस मुद्दे पर तीखा विवाद हुआ। लेकिन बाद में समिति ने तय किया कि प्रधानमंत्री को इसी हफ्ते फिर से बुलाया जाएगा, ताकि उनकी अगली अमेरिका यात्रा और एसपीपी के बारे में उनकी राय जानी जा सके। देउबा के जुलाई के मध्य में अमेरिका जाने की संभावना है।
इस बीच एसपीपी विवाद के लिए विदेश नीति के जानकार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पूर्व विदेश मंत्री रमेश नाथ पांडे ने कहा है- ‘एसपीपी प्रकरण एक राष्ट्रीय त्रासदी है। यह देश के राजनयिक तंत्र की पूरी नाकामी का परिणाम है। जिस खराब ढंग से इस मामले से निपटा गया है, उससे भरोसे का संकट खड़ा हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह उठा है कि आखिर इस देश में किस पर यकीन किया जाए।’
यूएमएल अब दावा कर रही है कि 2015 में नेपाली सेना ने बिना तत्कालीन प्रधानमंत्री को जानकारी दिए अमेरिकी नेशनल गार्ड को पत्र लिखा था। यूएमएल के सचिव और पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ये बात कही है। जबकि जनरल शर्मा ने संसदीय समिति के सामने कहा था कि सेना ने जो कुछ किया, वह सरकार को भरोसे में लेने के बाद किया गया।
बीते शुक्रवार को संसदीय समिति के सामने सेनाध्यक्ष जनरल शर्मा ने खंडन किया था कि नेपाली सेना एसपीपी में शामिल हो चुकी है। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि नेपाली सेना को अमेरिका से दो हेलीकॉप्टर मिले हैं, जबकि तीसरे हेलीकॉप्टर का वह इंतजार कर रही है। शर्मा शनिवार को लेबनान रवाना हो गए, जहां से वे 27 जून को अमेरिका जाएंगे। इस बीच नेपाली सेना पर विवादों का साया रोज गहराता जा रहा है।