डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में रक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया गया है। बदलाव के तहत अब अफ्रीकी देशों को अपनी सुरक्षा खुद करने के लिए तैयार करने की बात कही जा रही है। वहीं अमेरिका जहां अफ्रीका से अपने प्रभाव को समेट रहा है, वहीं रूस और चीन, अफ्रीका में अपनी मौजूदगी को बढ़ा रहे हैं।
अब तक अमेरिका अफ्रीकी देशों की सुरक्षा पर फोकस कर रहा था और इसके लिए उसकी नीति सुशासन पर फोकस और उग्रवाद के मुकाबले की रही थी, लेकिन अब अमेरिका ने अफ्रीका को लेकर अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है। दरअसल अमेरिका और अफ्रीकी देशों के संयुक्त सैन्यभ्यास अफ्रीकी लॉयन के आखिरी दिन मीडिया से बात करते हुए अफ्रीका में अमेरिकी सेना के शीर्ष कमांडर जनरल माइकल लैंगले ने कहा कि अब अफ्रीकी देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अपने पैरों पर खड़े होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे सहयोगी देश अब स्वतंत्र रूप से सैन्य संचालन में सक्षम हो जाएं।
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ट्रंप प्रशासन ने अपनी रक्षा नीति में किया बड़ा बदलाव
चार हफ्ते तक चले संयुक्त सैन्यभ्यास में 40 से ज्यादा देशों के सैनिकों ने हवाई, जमीन, और समुद्री चुनौतियों से निपटने की तैयारी की। इस दौरान ड्रोन्स, आमने-सामने की मुठभेड़ और सैटेलाइट गाइडेड रॉकेट्स का अभ्यास किया गया। अमेरिका ने अफ्रीका में शांति और स्थिरता के लिए कूटनीति, सुरक्षा और विकास की नीति अपनाई हुई थी, लेकिन अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में इस नीति में बड़ा बदलाव किया गया है। बदलाव के तहत अब अफ्रीकी देशों को अपनी सुरक्षा खुद करने के लिए तैयार करने की बात कही जा रही है।
रूस और चीन अफ्रीका में बढ़ा रहे अपनी मौजूदगी
जनरल लैंगले ने कहा कि अब हमारी प्राथमिकता अपने घर की सुरक्षा पहले है। अमेरिका अपनी सेना के आकार में कमी कर उसे और सक्षम, उन्नत और आधुनिक बनाना चाहता है। यही वजह है कि वह दुनियाभर में अपने सैनिकों की तैनाती को समेट रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका, अफ्रीका में ऐसे समय अपनी मौजूदगी घटाने पर विचार कर रहा है, जब रूस और चीन लगातार इस महाद्वीप में अपने पैर पसार रहे हैं। चीन ने भी अफ्रीकी देशों की सेनाओं को प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू कर दी है। रूस के वैगनर ग्रुप जैसे संगठन भी लगातार उत्तर, पश्चिम और मध्य अफ्रीका में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।
अफ्रीकी देशों में आतंकवादी फिर जमा सकते हैं अपने पैर
अफ्रीकी देश इस्लामिक आतंकवाद का गढ़ रहे हैं। कई देशों में अल कायदा और आईएसआईएस जैसे खूंखार आतंकी संगठनों के केंद्र हैं। ऐसे में जब अमेरिका, अफ्रीका से अपनी सैन्य मौजूदगी को कम करने पर विचार कर रहा है, तो इससे अफ्रीका में फिर से आतंकी संगठन अपने पैर जमा सकते हैं। साथ ही उग्रवाद भी अफ्रीकी देशों की बड़ी समस्या रही है, कई देश गृहयुद्ध जैसे हालात में हैं। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन की रक्षा नीति में बदलाव के अफ्रीका समेत पूरे विश्व पर गहरे असर होंगे।