अमेरिका में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सेना में लड़ाई के लिए जरूरी फिटनेस और शारीरिक बनावट के नियमों की समीक्षा करने का फैसला किया है। इसके बाद सवाल ये खड़ा हो रहा है कि क्या सभी सेनाओं लिए एक जैसे मानक होने चाहिए या फिर बदलते सामाजिक मानदंड और भर्ती की सच्चाई के आधार पर अलग-अलग नीतियां बननी चाहिए?
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सेना में लड़ाई के लिए जरूरी फिटनेस और शारीरिक बनावट के नियमों की समीक्षा करने का फैसला किया है। इससे अलग-अलग सेनाओं (थल, जल, वायु) के नियमों में अंतर को लेकर बहस शुरू हो सकती है। सवाल यह है कि क्या सभी के लिए एक जैसे नियम होने चाहिए या फिर भर्ती और समाज के बदलते नियमों के हिसाब से बदलाव होने चाहिए?
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महिलाओं के युद्ध क्षेत्र में जाने के विरोधी हेगसेथ
बता दें कि पूर्व सैन्य अधिकारी पीट हेगसेथ महिलाओं के युद्ध क्षेत्र में जाने के खिलाफ रहे हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को शामिल करने के लिए सेना के फिटनेस मानकों को आसान बनाया गया। वह चाहते हैं कि पुरुष और महिलाएं दोनों के लिए एक ही तरह के सख्त नियम लागू किए जाएं। रक्षा विभाग इस पर समीक्षा कर रहा है और आगे बदलाव किए जा सकते हैं।
अमेरिकी सेना को और मजबूत करने पर जोर
बीते 12 मार्च को भेजे गए एक ज्ञापन में हेगसेथ ने इस मामले में इरादे पूरी तरह से साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि सेना के शारीरिक फिटनेस, शरीर की संरचना से जुड़े सभी मानकों पर जानकारी इकट्ठा की जाए, जिसमें दाढ़ी भी शामिल हो, लेकिन केवल दाढ़ी तक ही सीमित नहीं। उनका कहना था कि हमें ऐसे मानक बनाए रखने चाहिए जो हमारी सेना को मजबूत बनाए रखें, ताकि सेना दुनिया की सबसे प्रभावी लड़ाकू सेना बनी रहे।
सेना के फ्रंटलाइन में काम करने वाली महिलाओं के लिए चिंता
देखा जाए तो हेगसेथ की ये समीक्षा खासकर उन महिलाओं के लिए चिंता का कारण है जो फ्रंटलाइन पर वर्षों से काम कर रही हैं। ज्ञापन में 2015 के बाद हुए मानक परिवर्तनों की समीक्षा की गई है, जब महिलाओं के लिए सेना के सभी विभाग में नौकरियां खोल दी गई थी।
क्या सैन्य परीक्षणों को बनाया जाएगा समान?
हालांकि रक्षा मंत्री हेगसेथ के सेना का समीक्षा करने के इस फैसले के बाद सवाल ये खड़ा हो रहा है किक्या सभी सैन्य परीक्षणों को समान बनाया जाएगा या फिर लिंग और उम्र के आधार पर अलग-अलग मानक बनाए जाएंगे। गौरतलब है कि अमेरिका में अभी के नियमों के अनुसार उम्र और लिंग के आधार पर फिटनेस परीक्षणों को नंबर दिया जाता है। इस बदलाव से भर्ती और सैनिकों को रखने में मुश्किल हो सकती है, क्योंकि उन्हें अचानक कठिन मानकों को पूरा करने के लिए कहा जा सकता है।