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US: एक्सबॉक्स में छंटनी से अमेरिका में H-1B वीजा पर बढ़ा विवाद, माइक्रोसॉफ्ट और भारतीय मूल की CEO पर उठे सवाल

Fri, 10 Jul 2026 11:43 PM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

माइक्रोसॉफ्ट के एक्सबॉक्स डिवीजन में हुई बड़ी छंटनी के बाद अमेरिका में H-1B वीजा प्रोग्राम का अब विरोध तेज हो गया है। अमेरिकी सांसद और सोशल मीडिया यूजर्स ने कंपनी पर अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर सस्ते विदेशी कर्मचारियों को रखने का गंभीर आरोप लगाया है।
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एक्सबॉक्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने दुनिया भर में अपने कुल कार्यबल के लगभग 2.1 प्रतिशत यानी 4,800 कर्मचारियों को निकालने की घोषणा की है। इसमें से लगभग 3,200 नौकरियां कंपनी के एक्सबॉक्स गेमिंग डिवीजन से खत्म की जा रही हैं। इस छंटनी के बाद अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को मिलने वाले H-1B वीजा प्रोग्राम का विरोध तेज हो गया है। आलोचकों का आरोप है कि अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह सस्ते विदेशी कर्मचारियों को रखा जा रहा है।
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अमेरिकी सांसद ने H-1B प्रोग्राम को बंद करने की मांग की
वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने इस छंटनी को लेकर H-1B वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह बंद करने की मांग की है। उन्होंने इसे एक बड़ा घोटाला बताया। मूर ने आरोप लगाया कि बड़ी टेक कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए इस प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने एक स्थानीय मीडिया आउटलेट से बातचीत में कहा कि यह प्रोग्राम अमेरिकी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी आपदा है। यह उन नौकरियों को छीन रहा है जिनके लिए अमेरिकी माता-पिता अपने बच्चों को कॉलेज या ट्रेड स्कूल भेजते हैं। मूर ने कानूनी रोजगार-आधारित आव्रजन को कुछ मामलों में अवैध आव्रजन से भी बदतर बताया।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
सोशल मीडिया पर भी लोग इस छंटनी को लेकर काफी नाराज हैं। कुछ लोगों ने एक्सबॉक्स की भारतीय मूल की सीईओ आशा शर्मा पर निशाना साधा है, जिन्हें इसी साल फरवरी में नियुक्त किया गया था। लोगों का आरोप है कि वह जानबूझकर अमेरिकी कर्मचारियों को निकाल रही हैं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने लिखा कि जब कोई भारतीय सत्ता में आता है, तो वह अमेरिकी कर्मचारियों को निकालना शुरू कर देता है। कुछ लोगों ने तो ऐसा करने वालों को जेल भेजने और उनकी संपत्ति जब्त करने की मांग भी की।
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माइक्रोसॉफ्ट ने आरोपों को नकारा
माइक्रोसॉफ्ट ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि छंटनी का फैसला व्यापारिक जरूरतों के आधार पर लिया गया है, न कि किसी के वीजा स्टेटस को देखकर। कंपनी ने बताया कि इस छंटनी का असर H-1B वीजा वाले कर्मचारियों पर भी पड़ा है। माइक्रोसॉफ्ट H-1B वीजा का लाभ उठाने वाली छठी सबसे बड़ी कंपनी है। इस वीजा प्रोग्राम में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है और वित्त वर्ष 2024 में यह 72.3 प्रतिशत थी। अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट को इस साल 2,273 विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीजा पर रखने की मंजूरी मिली है।

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वित्तीय संकट को बताया छंटनी का कारण
एक्सबॉक्स की सीईओ आशा शर्मा ने एक आंतरिक मेमो में बताया कि कंपनी की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। कंपनी का मुनाफा प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में तीन से 10 गुना कम है। इस पुनर्गठन के तहत कम से कम चार गेमिंग स्टूडियो को भी बेचा जाएगा। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी प्रशासन पहले से ही H-1B वीजा में धोखाधड़ी की जांच कर रहा है और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस प्रोग्राम के गलत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है।
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