अमेरिका में शनिवार को नो किंग्स प्रदर्शन हुआ, जिसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों, बढ़ती महंगाई और ईरान युद्ध के खिलाफ आवाज उठाई। न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को में लोग मार्च कर नारे, तख्तियां, गाने और नृत्य के जरिए विरोध जताते दिखे।
पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी संघर्ष ने दुनियाभर में कई सारी चिंताओं को जन्म दिया है। शुरुआत से बात करें तो ये संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। एक ओर मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 30वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव अब भी चरम पर है। दूसरी ओर अमेरिका के कई हिस्सों में शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध नीति के खिलाफ नो 'किंग्स' प्रदर्शन हुआ।
प्रदर्शन में लगाए गए नारे और तख्तियां भी दिखाई गई
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यह प्रदर्शन का तीसरा लहर, इसे भी समझिए
गौरतलब है कि अमेरिका में हो रहा यह नो किंग्स प्रदर्शनों की तीसरी लहर है। पिछले साल भी दो बड़े प्रदर्शन हुए थे, जिनमें लाखों लोग शामिल हुए थे। इन प्रदर्शनों के पीछे महंगाई, ईंधन की कीमतें और अर्थव्यवस्था में धीमापन जैसी समस्याएं भी कारण हैं। हालांकि फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में राष्ट्रपति ट्रंप के लगभग 50 समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच मौखिक झड़प भी हुई, लेकिन कुल मिलाकर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और जनता ने सरकार की नीतियों और आर्थिक समस्याओं के खिलाफ अपनी असहमति जताई।