सूडान की राजधानी खार्तूम में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच जारी संघर्ष के रुकने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। शनिवार को भी यहां खूब बमबारी हुई। सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच 15 अप्रैल से जारी सत्ता संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोग मारे गए हैं। इन सब के बीच दूसरे देशों के रहने वाले नागरिक फंस गए। भारत और अमेरिका जैसे देश अपने नागरिकों को निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
सूडान के बंदरगाह पहुंचा अमेरिका का पोत
अमेरिका सैकड़ों नागरिकों को खार्तूम से बाहर निकालने को लेकर निकासी शुरू कर दी है। विदेश विभाग ने एक बयान में बताया कि अमेरिकी सरकार का एक सुरक्षा बल अपने नागरिकों, स्थानीय रूप से कार्यरत कर्मचारियों और साझेदार देशों के नागरिकों को निकालने के लिए शनिवार को सूडान के बंदरगाह पहुंचा।
विदेश विभाग ने कहा कि अमेरिकी सरकार ने सूडान में अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करने और देश छोड़ने वाले नागरिकों को निकालने के लिए सक्षम और व्यापक प्रयास किए हैं। विभाग ने कहा कि हमने सूडान में हर अमेरिकी नागरिक को संदेश भेजा, जिन्होंने संकट के दौरान हमसे संपर्क किया और इस काफिले में शामिल होने के बारे में विशिष्ट निर्देश दिए हैं।
500 से ज्यादा लोग लोग मारे गए
बता दें कि कई देश अपने नागरिकों को सूडान से सड़क, वायु और समुद्र के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जहां सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच लड़ाई में सैकड़ों लोग मारे गए हैं। साथ ही पानी, भोजन, दवाओं और ईंधन की भारी कमी भी हो गई है। सूडान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार लड़ाई में कम से कम 500 से ज्यादा लोग लोग मारे गए हैं और 4,000 से अधिक घायल हुए हैं। ग्रेटर खार्तूम के कुछ जिले तो पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं।
सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच संघर्ष के परिणामस्वरूप सूडान रक्तपात का सामना कर रहा है। 72 घंटे के संघर्षविराम के बावजूद हिंसा के आरोप लगते रहे हैं। सूडानी सेना के नेता अब्देल फतह अल-बुरहान के वफादार सैनिकों और उनके डिप्टी, अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट सोल्जर्स कमांडर मोहम्मद हमदान डागलो के बीच लड़ाई छिड़ी हुई है।
भारत चला रहा ऑपरेशन कावेरी
वहीं यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी भारतीय नागरिक सूडान में न छूटे, भारत ने 24 अप्रैल को ऑपरेशन कावेरी शुरू किया और युद्धग्रस्त देश में अपने सैन्य विमानों और युद्धपोतों को भी तैनात किया है। साथ ही अमेरिका के विदेश विभाग ने अपने नागरिकों को सूडान की यात्रा न करने की चेतावनी भी दोहराई।