अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला डॉ. जिल बाइडन ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उपहार में दिए गए हीरे को अपने पास रखना चाहती थीं, लेकिन उसकी अधिक कीमत के कारण उन्होंने उसे संघीय सरकार को लौटा दिया। अपनी आत्मकथा 'व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग: ए मेमोइर' में बाइडन ने व्हाइट हाउस के जीवन और अमेरिका के प्रथम परिवार को मिलने वाले उपहारों से जुड़े सख्त नियमों का विस्तार से वर्णन किया है। यह पुस्तक इसी सप्ताह बाजार में आई है।
पीएम मोदी ने भेंट किया था 7.5 कैरेट का लैब-ग्रोन डायमंड
बाइडन को सबसे अधिक याद रहने वाले उपहारों में एक 7.5 कैरेट का लैब-ग्रोन डायमंड भी शामिल है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी वॉशिंगटन स्थित राजकीय यात्रा के दौरान भेंट किया था। बाइडन लिखती हैं, 'कभी-कभी उपहार के रूप में छोटी-छोटी चीजें मिलती थीं, जैसे फूल या शराब, लेकिन कभी-कभी बड़ी चीजें भी मिलती थीं। इनमें 7.5 कैरेट का वह लैब-ग्रोन डायमंड भी शामिल था, जो भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी राजकीय यात्रा के दौरान मुझे दिया था। यह रत्न प्रयोगशाला में निर्मित हीरों के क्षेत्र में अग्रणी बनने के भारत के प्रयासों का प्रतीक था'।
हीरे को लेकर क्या थी जिल बाइडन की योजना
बाइडन आगे लिखती हैं, 'यह हीरा बेहद खूबसूरत था। अमेरिकी नैतिक नियमों के अनुसार यह उपहार व्यक्तिगत रूप से मेरा नहीं था। तकनीकी रूप से यह मुझे नहीं, बल्कि प्रथम महिला के पद को दिया गया था, इसलिए यह संघीय सरकार की संपत्ति माना गया'। उन्होंने बताया कि एक निश्चित मूल्य से अधिक के उपहारों की सरकारी अधिकारियों द्वारा समीक्षा की जाती है और उनका रिकॉर्ड रखा जाता है। ऐसे उपहारों को प्राप्त करने वाला व्यक्ति उनके उचित बाजार मूल्य का भुगतान कर उन्हें खरीद सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के उपहार के मामले में उन्होंने शुरुआत में ऐसा करने पर विचार किया था।
पहले खरीदने का मन बनाया फिर कीमत जानकर टाल दिया विचार
बाइडन लिखती हैं, 'प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह उनके गृहनगर में 2,500 डॉलर में हस्तनिर्मित किया गया था। उनके पास इसकी रसीद भी थी। मैंने सोचा था कि शायद मैं इसे खरीद लूं। लेकिन बाद में विदेश विभाग ने इसकी कीमत 20,000 डॉलर आंकी, इसलिए मैंने इसे नहीं खरीदा'। उन्होंने आगे लिखा, 'मुझे बताया गया कि मैं इसे अपने कार्यालय में प्रदर्शित कर सकती हूं या पहनने के लिए उधार ले सकती हूं। इसलिए मैंने इसे अंगूठी में जड़वा लिया और आधिकारिक समारोहों में पहनती थी। यह व्यवस्था केवल व्हाइट हाउस में मेरे कार्यकाल तक ही रही। पद छोड़ने के बाद मैंने इसे वापस कर दिया। अंगूठी को अन्य अनगिनत राष्ट्रपति उपहारों के साथ एक गोदाम में रख दिया गया, जिनमें से कई को बाद में नष्ट कर दिया गया'।
यह संस्मरण इस घटना के माध्यम से व्हाइट हाउस के जीवन से जुड़े उन वित्तीय और नैतिक नियमों को रेखांकित करता है, जिन्हें अक्सर लोग ठीक से नहीं समझ पाते। बाइडन लिखती हैं कि आधिकारिक आवास, कार्यक्रमों और उपहारों से जुड़े विस्तृत नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग सरकारी संसाधनों या विदेशी उपहारों से व्यक्तिगत लाभ न उठा सकें।
जिल बाइडन ने कई अन्य उपहारों का भी किया जिक्र
बाइडन ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए हीरे की तुलना फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट मैक्रों द्वारा दिए गए एक कंगन से की है। इस कंगन का उनके लिए भावनात्मक महत्व था, इसलिए उन्होंने सरकार से इसे खरीद लिया ताकि पद छोड़ने के बाद भी वह इसे अपने पास रख सकें। बाइडन लिखती हैं, 'मैंने विदेश विभाग को भुगतान किया ताकि पद छोड़ने के बाद भी मैं इसे अपने पास रख सकूं। मैं इसे आज भी हर दिन पहनती हूं'। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले अन्य उपहारों का भी उल्लेख किया है। इनमें 'यूक्रेन द्वारा बम के छर्रों से बनाया गया एक ब्रोच' भी शामिल है, जिसकी कीमत अधिकारियों ने 14,063 डॉलर आंकी थी।
जून 2023 में पीएम मोदी ने की थी अमेरिका की यात्रा
2023 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा बाइडन प्रशासन के दौरान नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक मुलाकातों में से एक थी। व्हाइट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में 10,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकी शामिल हुए थे। इस यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस में राजकीय भोज का आयोजन किया गया था और रक्षा, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर तथा रणनीतिक क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था।