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ईरान पर नए हमलों की तैयारी?: 9000 सैनिक पश्चिम एशिया भेज रहा अमेरिका, ट्रंप ने दी धमकी; क्या होगा अगला कदम?

Fri, 02 Oct 2026 02:43 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन।

सार

अमेरिका पश्चिम एशिया में करीब 9 हजार और सैनिक भेज रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों की संभावना जताई है। अमेरिका का अगला कदम क्या होगा, क्या चुनाव के बाद ईरान पर हमले तेज होंगे? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
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अमेरिका करीब नौ हजार सैनिकों को जहाजों के एक समूह के जरिये पश्चिम एशिया भेज रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर धमकी दी है कि ईरान पर अमेरिका के नए सिरे से हमले हो सकते हैं।
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को क्या धमकी दी?
ट्रंप ने यह भी कहा कि शुरुआती संकेत बताते हैं कि बुधवार को इस्राइल जा रही एक उड़ान के सह-पायलट का ईरान से संबंध हो सकता है। इस सह-पायलट पर अपने कैप्टन को चाकू मारने और विमान को क्रैश करने की कोशिश करने का आरोप है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या हमले के पीछे पायलट और ईरान की राजधानी तेहरान के बीच कोई संबंध है। ट्रंप ने कहा, मैं जो सुन रहा हूं, उसके आधार पर इसका जवाब हां है। लेकिन हम अभी इस पर काम कर रहे हैं। उन्होंने इस बारे में कोई और जानकारी नहीं दी। ट्रंप ने यह भी धमकी दी कि अगर ईरान से संबंध की पुष्टि होती है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा।
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ट्रंप ने कहा, उन्हें बहुत जोर से निशाना बनाया जाएगा। चिंता मत करो। उन्होंने कहा, 'आप उनसे ही पूछिए। उन्हें पता है कि क्या हुआ है। उन्हें बहुत जोर से निशाना बनाया जाएगा।'

पश्चिम एशिया में कितने अमेरिकी सैनिक पहुंचेंगे?
इस बीच, पश्चिम एशिया की ओर जा रहे जहाजों के इस समूह में 7,000 से ज्यादा नौसैनिक और मरीन कॉर्प्स के 2,000 सैनिक हैं। इस समूह में यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट विमानवाहक पोत का स्ट्राइक ग्रुप शामिल है। यह हाल ही में यूएसएस चोसिन क्रूजर के साथ रवाना हुआ था। इसमें यूएसएस मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप भी शामिल है। इसमें यूएसएस जॉन पी. मुरथा और यूएसएस एंकोरेज एम्फीबियस लैंडिंग शिप शामिल हैं।

अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अक्तूबर के अंत तक इस क्षेत्र में तीन विमानवाहक पोत हो सकते हैं। इस अधिकारी ने संवेदनशील सैन्य अभियानों पर बात करने के लिए अपनी पहचान उजागर नहीं की।

अमेरिकी नौसेना के पास इससे पहले अप्रैल में पश्चिम एशिया में तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप थे। 2003 के बाद यह पहली बार हुआ था। यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन विमानवाहक पोत अभी इस क्षेत्र में हैं। इनके साथ यूएसएस बॉक्सर एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप भी है।

यूएसएस वॉशिंगटन को पश्चिम एशिया क्यों भेजा गया? 
यूएसएस वॉशिंगटन आमतौर पर प्रशांत महासागर में तैनात रहता है। लेकिन इसे यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह पश्चिम एशिया भेजा गया है। यूएसएस अब्राहम लिंकन की तैनाती काफी लंबी रही थी। इस दौरान उसके चालक दल को लगातार 260 दिनों से ज्यादा समय समुद्र में रहना पड़ा था।

क्या ईरान पर फिर बढ़ेगी अमेरिकी बमबारी?
ट्रंप ने गुरुवार को प्रकाशित टाइम पत्रिका के साथ एक इंटरव्यू में ईरान पर नए हमलों की संभावना पर बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका में तीन नवंबर के चुनाव के बाद ईरान में बमबारी बढ़ाना 'संभव' है। जब ट्रंप से इस बारे में और जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि वह अपनी रणनीति के बारे में ज्यादा नहीं बता सकते।

ट्रंप ने कहा, मैं आपको यह नहीं बता सकता। क्योंकि देखिए, आप पूछ रहे हैं कि आप कहां बम गिराएंगे? सोमवार को हुए इस इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के हालिया युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि जिन चीजों को मैं एक साल पहले मंजूर नहीं करता, उन्हें आज भी मंजूर नहीं करूंगा। 

ये भी पढ़ें: फ्लाईदुबई विमान मामला: संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया आरोपी सह-पायलट; सऊदी गृह मंत्रालय ने क्या कहा?

ईरान के युद्धविराम प्रस्ताव को क्यों ठुकराया?
ट्रंप ने उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान ने रणनीतिक ऊर्जा मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को 'खोलने' की पेशकश की थी। लेकिन उन्होंने कहा कि पूरा प्रस्ताव 'काफी अच्छा नहीं था'।

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या लगातार बढ़ती लोगों की नाराजगी वाला युद्ध नवंबर में रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी नतीजों को नुकसान पहुंचा सकता है, तो उन्होंने पहले कहा, यह संभव है। इसके बाद उन्होंने कहा, इससे मदद मिलनी चाहिए, क्योंकि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा। 
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राष्ट्रपति ने कहा कि 100 प्रतिशत लोग ईरान के पास परमाणु हमला करने की क्षमता होने का विरोध करते हैं। इसमें दुनियाभर के लोग शामिल हैं। इस तरह से कहेंगे, तो इससे मदद मिलेगी। अगर आप ऐसा नहीं कहते हैं, तो यह हो सकता है।
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