अमेरिका-ईरान के बीच फिर भड़का संघर्ष।
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अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष पर कहने को तो 17 जून से युद्ध विराम की स्थिति है, लेकिन बीते 11 दिन में दोनों देशों के बीच कम से कम तीन दिन टकराव हो चुका है। इस टकराव का केंद्र रहा है होर्मुज जलडमरूमध्य, जिस पर नियंत्रण को लेकर ही सारा विवाद पैदा हो रहा है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने दुनियाभर की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, ट्रंप ने ईरान के साथ फिर शुरू हुए संघर्ष को लेकर संकेत दिया है कि अमेरिकी सेना युद्ध को खत्म करने के लिए फिर पश्चिम एशिया क्षेत्र में लौट सकती है।
दोनों देशों के ताजा संघर्ष की बात करें तो ईरान की तरफ से होर्मुज में गुरुवार को एक वाणिज्यिक पोत को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने शुक्रवार और फिर शनिवार को ईरान में कई ठिकानों को हवाई हमलों से निशाना बनाया। इस बीच इस्राइल ने भी मौके का फायदा उठाते हुए लेबनान के साथ अंतरिम युद्धविराम को ठेंगा दिखाते हुए उस पर हमले किए। इनमें कुछ लोगों के हताहत होने की खबरें हैं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में क्या हुआ, जिसके चलते दोनों देश युद्ध विराम समझौते के एलान के बावजूद आमने-सामने आ गए? फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में क्या हालात हैं? यहां से होने वाली जहाजों की आवाजाही पर क्या असर पड़ा है? अमेरिका-ईरान की घरेलू राजनीति में इस वक्त क्या चल रहा है? दोनों का युद्ध आगे क्या राह ले सकता है और क्या ट्रंप एक बार फिर नौसेना को पश्चिम एशिया में उतारने का जोखिम मोल लेंगे? आइये जानते हैं...
पहले जानें- क्यों युद्ध विराम समझौते के बाद फिर आमने-सामने अमेरिका-ईरान
अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध विराम का समझौता (एमओयू) होने के बावजूद दोनों देशों में एक बार फिर सैन्य संघर्ष शुरू हो चुका है। इसकी मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार गहराता विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते की शर्तों को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।
हालिया समय में तनाव की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास से गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले एक वाणिज्यिक जहाज एवर लवली पर ड्रोन से हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को युद्ध विराम समझौते का मूर्खतापूर्ण उल्लंघन करार दिया। इसके जवाब में, अमेरिका ने ईरान के तटीय रडार साइटों, मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थानों पर लगातार हवाई हमले किए।
अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने कुवैत में अली अल सलेम एयर बेस और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागकर जवाबी हमला किए।
अंतरिम समझौते के बावजूद क्यों होर्मुज को लेकर भिड़ रहे हैं अमेरिका-ईरान
- 14-सूत्रीय युद्ध विराम समझौते के तहत ईरान को 60 दिनों के लिए बिना किसी शुल्क के वाणिज्यिक जहाजों का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना था, जो अमेरिका के लिए ईरान की मुख्य रियायत थी।
- हालांकि, ईरान होर्मुज को खोलने के बावजूद इस पर अपना नियंत्रण बरकरार रखने की कोशिश में है। वह इसे भविष्य में अमेरिका के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत के रूप में देख रहा है।
- ईरान ने फारस की खाड़ी में एक प्राधिकरण गठित किया है। इसके जरिए होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क देने और अपने स्वीकृत मार्गों से ही जहाजों को निकलने देने का फरमान जारी किया है।
- दूसरी तरफ अमेरिका और खाड़ी देश ईरान की तरफ से जहाजों के गुजरने का शुल्क देने के खिलाफ हैं। इन देशों ने होर्मुज पर ईरान के मनमाने नियमों का विरोध किया है और उसके नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए हैं।
अमेरिका ईरान के बीच वार-पलटवार का नया दौर।
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होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात कैसे?
होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण हुए हैं। इसका असर यह हुआ है कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ शांति समझौता अचानक टूटने की कगार पर पहुंच गया है।
1. ईरान की ओर से किए गए हमले
वाणिज्यिक जहाजों पर: ईरान ने गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज एवर लवली पर ड्रोन से हमला किया। इसके बाद शनिवार को पनामा के झंडे वाले वाणिज्यिक टैंकर 'एम/टी किकु' को भी एक ईरानी ड्रोन द्वारा निशाना बनाया गया, जो 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल ले जा रहा था।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर: अमेरिका के हवाई हमलों के जवाब में, ईरान की आईआरजीसी ने कुवैत स्थित अमेरिकी अली अल सलेम एयर बेस और बहरीन के पोर्ट सलमान में अमेरिकी पांचवें नौसैनिक बेड़े के मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। बहरीन सरकार के मुताबिक, ईरानी हमलों के कारण उनके देश में एक आवासीय इमारत को भी नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी की जान नहीं गई।
अमेरिका-ईरान में ताजा विवाद भड़कने की टाइमलाइन।
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2. अमेरिका की तरफ से किए गए जवाबी हमले
वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी आक्रामकता के जवाब में अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास और ईरान के दक्षिणी तट पर 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर लगातार दो दिन बमबारी की है। अमेरिका ने जिन स्थानों को निशाना बनाया उनमें सिरीक, बंदर-ए लेंगेह और केशम द्वीप शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के तटीय रडार साइटों, मिसाइल और ड्रोन भंडारण सुविधाओं, सैन्य निगरानी बुनियादी ढांचे, संचार प्रणालियों, वायु रक्षा साइटों और माइन बिछाने की क्षमताओं को तबाह किया।
फिर शुरू हुए संघर्ष का होर्मुज पर क्या असर पड़ा?
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए संघर्ष और हमलों ने समुद्री यातायात और व्यापार पर असर डालना शुरू कर दिया है।
होर्मुज में अमेरिका-ईरान दोनों का ही डर, अलग-अलग मार्गों से गुजर रहे जहाज
फारस की खाड़ी में स्थित इस संकरे जलमार्ग में अब एक के बजाय तीन अलग-अलग मार्ग बन गए हैं। पहला मार्ग दक्षिण में ओमान के पास है, दूसरा मार्ग जलडमरूमध्य के बीच में है, जिसका युद्ध से पहले इस्तेमाल होता था। तीसरा मार्ग उत्तर में है जिसे ईरान नियंत्रित कर रहा है। इन अलग-अलग मार्गों पर जहाजों के यातायात को नियंत्रित करने की ईरान की मंशा से नैविगेशन में भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। दरअसल, जहाज संचालक डरे हुए हैं और असमंजस में हैं। अगर वे ईरान की ओर से बताए गए मार्ग से नहीं जाते हैं, तो उन पर समुद्री खदानों, हवाई ड्रोन और ईरानी गश्ती नौकाओं से हमले का खतरा बना रहता है। वहीं, अगर वे ईरान की शर्तें मानते हैं, तो उन्हें डर है कि शांति समझौता टूटने की स्थिति में उन पर पश्चिमी देशों और अमेरिका के कड़े प्रतिबंध लग सकते हैं।
दुर्घटनाओं का बढ़ता जोखिम
जो जहाज प्रतिबंधों से बचने के लिए ओमान वाले रास्ते को चुन रहे हैं, उन्हें बहुत कम जगह मिल रही है। वे एक-दूसरे के बेहद करीब से गुजर रहे हैं, जिससे समुद्र में दुर्घटनाओं का भारी जोखिम पैदा हो गया है। अमेरिकी नौसेना के अंतर्गत आने वाले जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर ने भी जलमार्ग में खतरे के स्तर को बढ़ाकर सब्सटेंशियल यानी काफी ज्यादा के स्तर पर कर दिया है।
नाविकों की मानवीय निकासी पर रोक
वाणिज्यिक जहाज एवर लवली पर हुए ड्रोन हमले के बाद, इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (आईएमओ) ने 500 से ज्यादा वाणिज्यिक जहाजों की मानवीय निकासी अभियान पर तत्काल रोक लगा दी। इन जहाजों पर 11,000 से अधिक नाविक फंसे हुए हैं। हालात इतने डरावने हैं कि कम से कम चार जहाजों ने अपनी यात्रा बीच में ही रद्द कर दी और वापस लौट गए।
बीमा लागत में भारी बढ़ोतरी
बार-बार अमेरिका-ईरान के टकराव के जोखिम की वजह से शिपिंग कंपनियों के बीमा प्रीमियम आसमान छू रहे हैं। जहाजों के मालिकों को हमलों से बचने के लिए एक बड़े कच्चे तेल के पोत के लिए 10 लाख डॉलर से ज्यादा का बीमा प्रीमियम देना पड़ रहा है। अब जहाजों को बीमा हासिल करने के लिए पहले से ही यह बताना जरूरी हो गया है कि वे तीनों में से कौन सा मार्ग चुनने वाले हैं।
शांति समझौते के कागजों तक सीमित रह जाने और समुद्र में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इसके चलते दुनिया के इस सबसे अहम ऊर्जा गलियारे की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से खतरे में पड़ गई है।
होर्मुज में जहाजों के गुजरने के लिए बने तीन रास्ते।
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अमेरिका-ईरान की घरेलू राजनीति में इस वक्त क्या चल रहा है?
1. अमेरिका में ट्रंप का भारी विरोध
- ईरान के साथ युद्ध और होर्मुज के बार-बार बाधित होने से वैश्विक स्तर पर तेल और ईंधन की कीमतों उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। इसके चलते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इस युद्ध को पूरी तरह खत्म करने और बातचीत की मेज पर लौटने का भारी घरेलू दबाव बन रहा है।
- ट्रंप के नए सैन्य फैसलों का अमेरिकी संसद में भी विरोध हुआ। हाल ही में ट्रंप की युद्ध से जुड़ी शक्तियों पर लगाम लगाने के लिए संसद में एक प्रस्ताव पारित हुआ था। अब डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने ईरान पर अमेरिका के ताजा हमलों को उस प्रस्ताव का खुला उल्लंघन बताया है। उन्होंने ट्रंप को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने यह युद्ध नहीं रोका, तो वे राष्ट्रपति को अदालत में घसीटेंगे।
- घरेलू विरोध के बावजूद ट्रंप और उनका प्रशासन, खासकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। ट्रंप ने इस समझौते को ईरान का बिना शर्त आत्मसमर्पण बताया था और सेना के वापस लौटने का एलान किया था। हालांकि, अब उन्होंने ईरान को खुली धमकी दी है कि अगर उसने हमले जारी रखे तो अमेरिका अपने काम को सैन्य रूप से पूरा करने के लिए मजबूर होगा और ईरान का वजूद खत्म हो जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
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2. ईरान की घरेलू राजनीति
- ईरान की घरेलू राजनीति में इस वक्त होर्मुज जलडमरूमध्य नियंत्रण का मुद्दा सबसे अहम है। ईरानी नेताओं और रणनीतिकारों का मजबूती से मानना है कि यह जलमार्ग उनका सबसे बड़ा अस्त्र है। उनका मानना है कि अगर उन्होंने इस पर से दबाव हटा लिया, तो अमेरिका के सामने बातचीत की मेज पर उनकी स्थिति काफी कमजोर हो जाएगी।
- ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने घरेलू स्तर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज का प्रशासन अब किसी भी कीमत पर युद्ध से पहले वाली स्थिति में नहीं लौटेगा। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने भी सीधे तौर हमलों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।
- ईरान का विदेश मंत्रालय और आईआरजीसी घरेलू स्तर पर अमेरिका को एक संधि तोड़ने वाले और अविश्वसनीय देश के रूप में पेश कर रहे हैं। देश की जनता के बीच यह संदेश जोर-शोर से फैलाया जा रहा है कि अमेरिका की किसी भी आक्रामकता का तुरंत, निर्णायक और करारा जवाब दिया जाएगा।
अमेरिका-ईरान के संघर्ष का नया दौर आगे क्या राह ले सकता है?
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़का यह संघर्ष दोनों देशों को एक बेहद खतरनाक दोराहे पर ले आया है। मौजूदा हालात के आधार पर विशेषज्ञों ने इस युद्ध को लेकर कुछ आशंकाएं जताई हैं...
1. पूरी तरह रद्द हो सकता है शांति समझौता
दोनों देशों के बीच हाल ही में हुआ 14-सूत्रीय युद्धविराम समझौता बहुत नाजुक स्थिति में है और विश्लेषकों का मानना है कि यह किसी भी समय पूरी तरह टूट सकता है। क्विंसी इंस्टीट्यूट के ट्रिटा पारसी के मुताबिक, होर्मुज में चल रही सैन्य गोलाबारी और लेबनान में इस्राइल की अभी भी आंशिक सैन्य मौजूदगी के कारण इस समझौते के टूटने की आशंका बहुत तेजी से बढ़ गई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि समझौते का कोई भी उल्लंघन आगे की पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया को रोक देगा।
2. होर्मुज में चरम अराजकता और आर्थिक दबाव
अगर अगस्त के मध्य तक कूटनीतिक रूप से विवाद नहीं सुलझता है, तो जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए बने तीन अलग-अलग मार्गों (ओमान, मध्य और ईरानी रूट) में स्थिति कहीं अधिक अराजक और असुरक्षित हो जाएगी। शिपिंग कंपनियां पहले से ही एक तरफ अमेरिकी प्रतिबंधों के डर और दूसरी तरफ ईरानी हमलों के खौफ के बीच फंसी हुई हैं। दूसरी तरफ ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है और भविष्य में समुद्री सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर जहाजों से कर या शुल्क वसूलने की योजना बना रहा है, जिसे अमेरिका स्पष्ट रूप से खारिज करता है।
3. युद्ध का फिर बढ़ा खतरा और विनाश की धमकियां
बयानबाजी का स्तर अपने चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधी चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अपनी आक्रामकता नहीं रोकी, तो वे अपना काम सैन्य रूप से पूरा करेंगे यानी अमेरिकी सेना पश्चिम एशिया के क्षेत्र में लौट सकती है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी जोर देकर कहा है कि हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा।" जवाब में ईरान के आईआरजीसी ने भी कहा है कि किसी भी तरह के हमले का करारा जवाब दिया जाएगा।
4. संघर्ष में कूदने से ज्यादा बातचीत की मेज पर रहने पर जोर
लगातार हमलों और धमकियों के बावजूद अमेरिकी अधिकारियों ने फिलहाल बड़े पैमाने पर सैन्य युद्ध शुरू करने की संभावनाओं से इनकार किया है। पूर्ण युद्ध को टालने और कूटनीति की ओर वापस लौटने के पीछे एक बड़ी वजह वैश्विक ऊर्जा संकट है, जिसकी वजह से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप पर ईरान से बातचीत का दबाव है। विश्लेषक एंड्रिया डेसी के मुताबिक, दोनों देशों (अमेरिका और ईरान) का इसी में हित है कि वे इस स्थिति को पूर्ण युद्ध में न बदलने दें।