अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु विवाद अब जिद और प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। इस्लामाबाद में हुई बातचीत भले बेनतीजा रही, लेकिन दोनों देश 80% सहमति तक पहुंच चुके थे। फिर सवाल उठता है कि आखिर समझौता क्यों अटका? 20 साल बनाम 5 साल की जिद कब टूटेगी और क्या यह टकराव और खतरनाक मोड़ लेगा?
पश्चिम एशिया में सुलगते टकराव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दा अब प्रतिष्ठा और दबदबे की सीधी लड़ाई बन चुका है। बीते दिनों पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई अहम बातचीत भले ही बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई हो, लेकिन इसने यह साफ कर दिया है कि दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं। मीडिया रिपोर्टस की माने अमेरिका 20 साल तक परमाणु कार्यक्रम रोकने की सख्त शर्त पर अड़ा है, तो ईरान 5 साल से आगे झुकने को तैयार नहीं। ऐसे में यह विवाद अब सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि नाक का सवाल बन गया है।
समझौते के करीब पहुंचे थे दोनों देश
इस बात को ऐसे समझिए कि बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान दोनों देश लगभग 80% तक सहमति के करीब पहुंच गए थे। राजनीतिक विश्लेषक इयान ब्रेमर के अनुसार, बीच का रास्ता निकालते हुए करीब 12.5 साल का समझौता हो सकता है। दूसरी ओर यह बैठक खास इसलिए भी थी क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच यह 10 साल से ज्यादा समय बाद पहली सीधी बातचीत थी। साथ ही यह ईरानी क्रांति (1979) के बाद सबसे उच्च स्तर की बातचीत मानी जा रही है।
बातचीत का माहौल कैसा रहा?
यह बातचीत करीब 20 घंटे तक चली और माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। एक समय ऐसा भी आया जब बहस तेज हो गई और आवाजें बाहर तक सुनाई देने लगीं। इसके बाद मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के अधिकारियों ने ब्रेक कराया। इसका बड़ा कारण रहा कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर भरोसा न होने की बात भी कही।
अब समझिए बातचीत क्यों टूटी?
इस बातचीत के असफल होने का सबसे बड़ा कारण रहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके। दूसरी ओर ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा रहा और अमेरिका पर भरोसा करने से साफ-साफ इनकार करता रहा। हालांकि बातचीत बिना नतीजे खत्म हुई, लेकिन उम्मीद अभी भी बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश जल्द ही दूसरी बैठक कर सकते हैं।
ट्रंप ने फिर दोहराया अपना दावा
दूसरी ओर ट्रंप ने एक बार फिर साफ शब्दों में ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा परमाणु हथियार है। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना सकता और हम इसे होने नहीं देंगे। ट्रंप के अनुसार, बातचीत में कई बातों पर सहमति बनी थी, लेकिन ईरान इस शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि ईरान आखिरकार इस पर राजी हो जाएगा।
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