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चीन के हाथों की कठपुतली है पाकिस्तान?: ईरान-US युद्ध विराम में भूमिका पर सवाल, पूर्व अमेरिकी NSA को नीयत पर शक

Wed, 22 Apr 2026 11:23 AM IST
Shubham Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात के बीच पाकिस्तान की कूटनीति एक बार फिर कठघरे में है। नाकाम शांति वार्ताओं और विवादित दावों के बीच इस्लामाबाद की भूमिका पर सवाल गहराए हैं। पूर्व अमेरिकी एनएसए ने पाकिस्तान को चीन के प्रभाव में बंधा कठपुतली देश बताते हुए ईरान वार्ता में उसकी नीयत पर गंभीर संदेह जताया है। उनके इस बयान ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की रणनीतिक और पहले से ही खराब साख को और बड़ा झटका दिया है।

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अमेरिका-ईरान तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान एक बार फिर वैश्विक मंच पर कठघरे में खड़ा नजर आ रहा है। चाहे शांति वार्ता के संदर्भ में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के वो ड्राफ्ट संदेश हों या फिर इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान के बीच नाकाम शांति वार्ता। कई मंचों पर पाकिस्तान को अपने रवैये के चलते किरकिरी का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते इस्लामाबाद की कूटनीति लगातार सवालों के घेरे में भी रही है। ऐसे में एक बार फिर पाकिस्तानी की नापाक मंशा को लेकर सवाल तब खड़े हो गए जब अमेरिका के पूर्व एनएसए एचआर मैकमास्टर ने शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। 

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इतना ही नहीं सवाल केवल पाकिस्तान की भूमिका तक नही रही मैकमास्टर ने पाकिस्तान को चीन के हाथों का कठपुतली तक बता दिया। उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका को चीन के प्रभाव में बंधा कठपुतली देश करार देते हुए उसकी नीयत पर गंभीर संदेह जताया। ईरान से जुड़ी मध्यस्थता में पाकिस्तान की सक्रियता को भी उन्होंने संदिग्ध बताया है। कुल मिलाकर मैकमास्टर ने कहा कि पाकिस्तान, चीन के प्रभाव में काम करने वाला एक कठपुतली देश जैसा है और ईरान से जुड़े कूटनीतिक मामलों में उसकी नीयत पूरी तरह साफ नहीं लगती।

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पाकिस्तान की भूमिका पर क्या बोले मैकमास्टर?
बता दें कि पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने यह बात IANS न्यूज एजेंसी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कही। इस दौरान उनसे जब पूछा गया कि ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका कैसी है, तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के करीबी देश के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन, ईरान की मौजूदा सरकार को बनाए रखने में दिलचस्पी रखता है, क्योंकि वह ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदता है।

उनके अनुसार, इसी वजह से चीन ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखता है। इतना ही नहीं मैकमास्टर ने आगे पाकिस्तान की निष्पक्षता पर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश पूरी तरह निष्पक्ष नहीं मानी जा सकती और इसके पीछे पाकिस्तान के कुछ छिपे हुए नापाक इरादे भी हो सकते हैं।

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पाकिस्तान और आतंकवाद समूह को लेकर उठाए सवाल
इस दौरान मैकमास्टर ने पाकिस्तान की सेना पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनका अनुभव पाकिस्तान की सेना के साथ निराशाजनक रहा है। उनके अनुसार, पाकिस्तान एक तरफ आतंकवाद विरोधी सहयोग की बात करता है, लेकिन दूसरी तरफ वह कुछ ऐसे समूहों को भी समर्थन देता है जो अमेरिका के खिलाफ काम करते हैं। मैकमास्टर ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान 1940 के दशक के अंत से ही आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल अपनी विदेश नीति के एक हिस्से के रूप में करता रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि चीन द्वारा ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने से वहां की सरकार को आर्थिक ताकत मिलती है, जिससे उसकी क्षेत्रीय गतिविधियां जारी रहती हैं। इन सभी बातों के आधार पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की भूमिका को चीन की रणनीतिक नीति से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

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