ईरान और होर्मुज को लेकर ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब किसी भी हाल में परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा, क्योंकि उसकी क्षमता पर निर्णायक नियंत्रण स्थापित कर दिया गया है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज पर लगी नौसैनिक सख्ती और दबाव तब तक जारी रहेगा, जब तक ईरान के साथ पूरी तरह से समझौता नहीं हो जाता।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत और पश्चिम एशिया के हालात पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत लगातार चल रही है और यह प्रक्रिया आने वाले सप्ताहांत में भी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि इस वार्ता में कई अच्छी चीजें हो रही हैं, और इसमें लेबनान से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। उनके अनुसार, अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई मतभेद हैं भी, तो उन्हें जल्द सुलझा लिया जाएगा क्योंकि कोई बड़ा अंतर नहीं दिख रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ईरान के मामले में अपनी पूरी ताकत और प्रभाव बनाए रखेगा और जब दोनों देशों के बीच समझौता पूरी तरह से तय और हस्ताक्षरित हो जाएगा तब होर्मुज पर अमेरिकी नाकाबंदी को खत्म कर दिया जाएगा। ट्रंप के अनुसार, जब तक यह प्रक्रिया 100 प्रतिशत पूरी नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका अपनी स्थिति मजबूत रखेगा।
ईरान के परमाणु हथियार पर क्या बोले?
इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के परमाणु हथियार को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी स्थिति को नियंत्रित किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के B-2 बॉम्बर विमानों की कार्रवाई से न्यूक्लियर डस्ट जैसी स्थिति बनी और ईरान अब किसी भी तरह का परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अमेरिका की मदद से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने या हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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क्या नाटो से नाराज हैं ट्रंप?
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने नाटो को लेकर भी अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति लगभग खत्म हो रही है, तब उन्हें नाटो से मदद का प्रस्ताव मिला। लेकिन उन्होंने कहा कि जब जरूरत थी, तब मदद नहीं मिली, और अब उन्हें उनकी मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नाटो को अमेरिका की ज्यादा जरूरत है, न कि अमेरिका को उनकी।