डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला में कार्रवाई और मादुरो को बंधक बनाने के फैसले ने अब खुद उनकी ही पार्टी में हलचल मचा दी है। शुरू में सांसदों का समर्थन जरूर मिला, लेकिन अब कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने चिंता जताई कि ट्रंप अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति से पीछे हट रहे हैं। इस कदम ने ट्रंप की चुनावी रणनीति और नेतृत्व पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से वेनेजुएला पर कई गई कार्रवाई और फिर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरे को बंधक बनाए जाने के मामले ने जहां एक तरफ वैश्विक राजनीति में तहलका मचा दी है। वहीं दूसरी ओर अब खुद ट्रंप के लिए ये कार्रवाई एक बड़ा राजनीतिक परीक्षण बन गया है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि जब ट्रंप ने मादुरो को पकड़कर अमेरिका लाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया। तब शुरुआत में कई रिपब्लिकन नेताओं ने उनका समर्थन किया, लेकिन अब पार्टी के भीतर असंतोष देखा जा रहा है। साथ ही इस कार्रवाई से ट्रंप की चुनावी रणनीति और ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर नए सवाल भी खड़े हो रहे हैं। आइए जानते हैं कैसे?
ट्रंप के समर्थन में क्या बोले ये सांसद?
वहीं मेन की सीनियर सांसद सुसान कॉलिन्स ने कहा कि मादुरो नार्को-आतंकवादी और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर हैं और उन्हें मुकदमा झेलना चाहिए। वहीं केंटकी के सांसद रैंड पॉल ने कहा कि देखना होगा कि यह बदलाव बिना ज्यादा खर्च और नुकसान के सफल होगा या नहीं। रिपब्लिकन नेता मिच मैककोनेल ने मादुरो को ठग बताया। साथ ही कहा कि ट्रंप के पास सीमित सैन्य कार्रवाई का संविधानिक अधिकार है।
ट्रंप ने क्या कहा था, जिससे बयानबाजी हुई तेज?
बता दें कि इससे पहले वेनेजुएला पर की गई कार्रवाई के बाद शनिवार को ट्रंप ने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो वेनेजुएला की जमीन पर अमेरिकी सैनिकों को भेजने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा था कि उनका उद्देश्य अमेरिकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।