कैलिफोर्निया में भारतीय प्रवासियों ने किया बीबीसी का विरोध
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गुजरात दंगों को लेकर बनाई गई बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री का दुनियाभर में विरोध किया जा रहा है। विदेशों में रहने वाले भारतीयों समेत अन्य लोगों ने भी इस मुद्दे पर बीबीसी पर पक्षपातपूर्ण पत्रकारिता करने का आरोप लगाया है। इसी क्रम में शनिवार को अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासियों ने कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र के फ्रेमोंट में बीबीसी डॉक्यूमेंट्री सीरीज "इंडिया: द मोदी क्वेश्चन" के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
अमेरिका के कैलिफोर्निया में भारतीय प्रवासियों ने किया बीबीसी का विरोध
जानकारी के मुताबिक, यहां 'इंडियन डायस्पोरा' के बैनर तले करीबन 50 सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए फ्रेमोंट की सड़कों पर मार्च निकाला। प्रदर्शन कर रहे भारतीय प्रवासियों का कहना था कि वह लोग बीबीसी की भयावह और पक्षपातपूर्ण डॉक्यूमेंट्री को अस्वीकार करते हैं। फ़्रेमोंट में मार्च करते समय प्रवासियों ने बीबीसी पर पक्षपाती औक नस्लवादी होने के आरोप भी लगाए। इस दौरान लोगों ने बीबीसी के विरोध वाले बैनर भी पकड़ रखे थे। भारतीय डायस्पोरा ने विरोध करते हुए कहा कि बीबीसी अपनी बायस्ड डॉक्यूमेंट्री के जरिए एक फेक प्रोपेगंडा फैला रही है।
बीबीसी के कार्यालय के खिलाफ किया प्रदर्शन
गुजरात दंगों पर बनाई गई विवादित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री के खिलाफ लंदन के पोर्टलैंड प्लेस में स्थित बीबीसी मुख्यालय के बाहर भारतीय प्रवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
ब्रिटेन में भी हो चुका है विरोध
ब्रिटेन के राष्ट्रीय प्रसारक बीबीसी ने 2002 के गुजरात दंगों को लेकर दो-भाग की सीरीज रिलीज की। ब्रिटेन के प्रमुख भारतीय मूल के नागरिकों ने भी इसकी निंदा की थी। यूके नागरिक लॉर्ड रामी रेंजर ने इस पर कहा था कि बीबीसी ने एक अरब से अधिक भारतीयों की भावनाओं को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
डॉक्यूमेंट्री में क्या है, जिस पर विवाद हो रहा है?
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर बीबीसी ने India: The Modi Question शीर्षक से दो पार्ट में एक नई सीरीज बनाई है। इसका पहला पार्ट मगंलवार को जारी किया गया था। इस सीरीज में पीएम मोदी के शुरुआती दौर के राजनीतिक सफर पर बातें की गईं हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनके जुड़ाव, भाजपा में बढ़ते कद और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति की चर्चा भी इसमें की गई है। मोदी के मुख्यमंत्री रहते गुजरात में हुए दंगों का भी इसमें जिक्र है। इस हिस्से में गुजरात दंगों में पीएम मोदी की कथित भूमिका की बात कही गई है। इसी को लेकर विवाद हो रहा है।
विवाद कहां से शुरू हुआ?
17 जनवरी को इसे बीबीसी टू पर रिलीज किया गया था। सीरीज के आते ही विवाद शुरू हो गया। ब्रिटेन में सोशल मीडिया पर इसका विरोध शुरू हुआ। इसको लेकर लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि बीबीसी को 1943 के बंगाल अकाल पर भी सीरीज बनानी चाहिए। जिसमें 30 लाख से ज्यादा लोगों की भुखमरी और बीमारी के कारण मौत हो गई थी। एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि बीबीसी को यूकेः द चर्चिल क्वेश्चन शीर्षक से भी सीरीज बनानी चाहिए। विवाद बढ़ता देख एक दिन बाद ही बुधवार को बीबीसी ने सीरीज को यूट्यूब से हटा दिया।
भारत ने की थी निंदा
इस सीरीज के रिलीज होने के दो दिन बाद यानी 19 जनवरी को भारत ने विवादास्पद बीबीसी सीरीज की निंदा की थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे केवल एक प्रचार प्रोपेगेंडा बताया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि ब्रिटेन की कुछ आंतरिक रिपोर्ट पर आधारित यह डॉक्यूमेंट्री औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।