"मुझे नहीं लगता कि इस आशंका की वजह से हम अपनी बौद्धिक संपदा के लिए कदम नहीं उठाएंगे, लेकिन हम हर चीज को उचित तरीके से सोच-विचार कर करने की कोशिश कर रहे हैं।" "अगर चीन जवाबी कार्रवाई करेगा तो अमेरिका अपने किसानों के साथ खड़ा होने के लिए कदम उठाएगा।" ट्रंप ने अब तक व्यापार क्षेत्र में क्या कदम उठाए? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च में एक विवादास्पद फैसले पर मुहर लगाई जिसके बाद स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर दूसरे देशों को शुल्क देना पड़ेगा। कनाडा और मेक्सिको को इससे छूट दी गई है। यूरोपीय संघ भी छूट मिलने की उम्मीद में बैठा है।
जनवरी में ट्रंप ने वॉशिंग मशीन और सोलर पैनलों के आयात पर भी टैक्स लगाए जिससे चीन और दक्षिण कोरिया में नाराजगी बढ़ी। इसके अलावा 12 देशों के मुफ्त व्यापार सौदे की पार्टनरशिप से भी अमेरिका को बाहर खींच लिया। साथ ही कनाडा और मेक्सिको के साथ नॉर्थ अमेरिकन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एनएएफटीए) पर भी दोबारा समझौता किया जा रहा है जिसे लेकर ट्रंप कहते रहे हैं कि ये अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नौकरियां कम करने का कारण रहा है।
क्या व्यापार युद्ध हो सकता है?
चीन ने पहले कहा है कि व्यापार युद्ध में किसी की जीत नहीं होगी। उसने दोनों देशों को शांति बनाए रखने के लिए भी कहा था और इस बात के संकेत दिए थे कि वह अमेरिका की संतुष्टि के लिए उम्मीद से ज्यादा बदलाव करने को तैयार है। ट्रंप ने एक बार ट्वीट किया था कि व्यापार युद्ध अच्छे हैं और उन्हें जीतना भी आसान है। लेकिन अमेरिका की वित्त सचिव स्टीवन न्यूचीन ने कहा कि राष्ट्रपति
व्यापार युद्ध शुरू करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
रॉयटर्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक अमेरिका की इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की सबसे बड़ी कंपनी 'बेस्ट बाय' ने चीन की कंपनी ह्युवेई से स्मार्टफोन खरीदने बंद कर दिए हैं। इसके बाद दूसरी टेलीकॉम कंपनियों एटीएंडटी और वेरीजोन ने भी ह्युवेई से संबंध खत्म कर लिए जब अमेरिका ने चीन सरकार से उसकी करीबी पर चिंता जताई। बेस्ट बाय ने इन दावों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
इस बीच बुधवार को विश्व व्यापार संगठन ने कहा कि अमेरिका ने उसके चीनी उत्पादों पर एंटी-सब्सि़डी टैरिफ के फैसले पर अब तक पूरी तरह अमल नहीं किया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि विश्व व्यापार संगठन के फैसले के बाद ये साबित हो गया कि अमेरिका ने
डब्लूटीओ के नियमों का बार-बार उल्लंघन किया है और व्यापार मामलों के निवारण के लिए बने नियमों का गलत इस्तेमाल किया है।