अमेरिकी नागरिकता सेवा (यूएससीआईएस) ने नया नियम जारी किया है, जिसके तहत ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिलाओं के खेलों में हिस्सा लेने के लिए वीजा नहीं मिलेगा। यह ट्रंप के कीप मेन आउट वूमेन स्पोर्ट्स आदेश के तहत आया है। इसके तहत अब ओ-1A, ई11, ई21 और नेशनल इंटरेस्ट वाइवर्स में बदलाव कर पुरुष खिलाड़ियों को वीजा देने से रोक लगा दी गई है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार रूप से अमेरिकी वीजा को लेकर नए और सख्त कानून लाने की प्रक्रिया तेज कर चुके है। जहां अब वीजा ओवरस्टे के बाद ट्रंप प्रशासन ने खेल वीजा को लेकर भी एक नया नियम लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत बताया गया है अब ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिलाओं के खेलों में हिस्सा लेने के लिए वीजा नहीं मिलेगा। प्रशासन के अनुसार इस नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं के खेलों में केवल महिला खिलाड़ी ही भाग लें। इस नए नियम को अमेरिकी की नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईसी) ने जारी किया है।
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बता दें कि यह नया नियम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश कीप मेन आउट वूमेन स्पोर्ट्स (पुरुषों को महिलाओं के खेलों से बाहर रखें) के अनुसार बनाया गया है। इस आदेश में कहा गया है कि जो पुरुष खिलाड़ी महिलाओं के खेलों में हिस्सा लेने के लिए अपने लिंग पहचान को बदलते हैं, उन्हें अमेरिका में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मामले में यूएससीआईएस ने बताया कि अब कुछ खास वीजा कैटेगरी जैसे ओ-1A, ई11, ई21 और नेशनल इंटरेस्ट वाइवर्स (एनआईडब्ल्यूएस) में बदलाव किया गया है ताकि खेल में सभी महिलाओं को समान मौका मिले। यूएससीआईएस के प्रवक्ता मैथ्यू ट्रैगेसर ने कहा कि पुरुष महिलाओं के खेलों में नहीं होने चाहिए। यह नियम उन पुरुष खिलाड़ियों को रोकने के लिए है जो अपने जैविक फायदे का गलत इस्तेमाल कर महिलाओ के साथ प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं।
पहले से दाखिल या लंबित वीजा आवेदन पर भी लागू होगा ये नियम
इसके साथ ही यूएससीआईएस ने यह भी कहा कि जो पुरुष पहले महिलाओं के खेलों में हिस्सा ले चुके हैं, उन्हें अब अमेरिका में वीजा मिलने में कठिनाई होगी। साथ ही ऐसे पुरुष खिलाड़ी जो अमेरिका में महिलाओं के खेलों में हिस्सा लेने के लिए आते हैं, उन्हें राष्ट्रीय हित में नहीं माना जाएगा। यह नया नियम तुरंत प्रभावी हो गया है और इसके तहत अब पहले से दाखिल या लंबित वीजा आवेदन पर भी यह लागू होगा। इस पूरे फैसले का मकसद महिलाओं और लड़कियों को उनके खेलों में सुरक्षित और न्यायसंगत मौका देना है, ताकि उनका सम्मान और अधिकार सुरक्षित रह सके।