चीन को लेकर अमेरिका ने अपने रवैये में और सख्ती दिखाते हुए अब अमेरिका में काम करने वाले चीनी मीडिया संस्थानों को निशाना बनाया है। ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया है कि अमेरिका में चल रहे पांच मीडिया संस्थान दरअसल अमेरिका में चीनी दूतावास के तरीके से काम कर रहे हैं और अमेरिका की खुफिया जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका ने इन संस्थानों के कर्मचारियों और उनके संपत्तियों का ब्यौरा मांगते हुए इन संस्थानों को विदेशी दूतावास की श्रेणी में तब्दील करने का फरमान जारी किया है। चीन ने अमेरिका के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि चीनी मीडिया पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए काम करती है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कंग श्वांग ने बताया कि चीनी मीडिया ने पूरी निष्पक्षता के साथ चीन और अमेरिका की जनता की समझ और संपर्क के आधार पर दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान में हमेशा से सकारात्मक भूमिका निभाई है।
उन्होंने अमेरिका से अनुरोध किया कि वह चीन के खिलाफ शीतयुद्ध बंद कर मीडिया के प्रति की गई इस कार्रवाई को वापस ले।
अमेरिकी विदेश विभाग ने सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ, चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क, चाइना रेडियो इंटरनेशनल, चाइना डेली डिस्ट्रिब्यूशन समेत पांच मीडिया संस्थानों से कहा है कि अमेरिका में किसी भी संपत्ति की खरीद से पहले उन्हें मंजूरी लेनी होगी।
विदेश विभाग ने यह भी कहा है कि इन संस्थानों को अमेरिकी नागरिकों समेत अपने सभी कर्मचारियों की सूची भी सौंपनी होगी। इस नए दर्जे के साथ ही ये संस्थान उन नियमों के दायरे में आ जाएंगे जो विदेशी दूतावासों तथा वाणिज्य दूतावासों पर लागू होते हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग के दो अधिकारियों ने कहा है कि ये फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि चीन इन मीडिया संस्थानों को अपनी सरकार के नियंत्रण में चलाने की कोशिश करता रहा है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग इन संस्थानों के जरिए तेजी से चीन के प्रचार का अपना एजेंडा चला रहे हैं। यहां काम करने वाले कर्मचारी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रचारतंत्र का हिस्सा हैं।