अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों में एक चौथाई अंक की वृद्धि की है। मार्च के बाद यह आठवीं बढ़ोतरी है। फेडरल रिजर्व के इस फैसले के बाद अब ब्याज दरें बढ़कर 4.50 से बढ़कर 4.75 अंक हो गई है। उसने संकेत दिया कि मुद्रास्फीति कम होने के कारण भी आगे चलकर इसकी दर में वृद्धि हो सकती है। इस कदम से कई उपभोक्ता, व्यावसायिक ऋणों में लागत व मंदी का खतरा बढ़ जाएगा।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दो दिनी बैठक के बाद कहा कि मुद्रा स्फीति कुछ हद तक कम जरूर हुई है लेकिन अभी भी यह उच्च स्तर पर बनी हुई है। अभी बीते 15 दिसंबर को ही फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.50 अंकों की बढ़ोतरी की थी। इस वर्ष के अंत तक दरों में 0.75 की बढ़ोतरी का अनुमान जताया जा रहा है।
यूएस फेड के इस कदम से अमेरिक समेत कई देशों में असर पड़ने की संभावना है। अमेरिका इन दिनों पिछले साल चार दशक की सबसे बड़ी महंगाई का सामना कर रहा है। यही वजह है कि अमेरिका को लगातार ब्याज दरें बढ़ानी पड़ रही हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा कि मैं कहूंगा कि हमारा ध्यान अल्पकालिक कदमों पर नहीं बल्कि व्यापक वित्तीय स्थितियों में निरंतर बदलाव पर है। यह हमारा निर्णय है कि हम अभी तक पर्याप्त रूप से प्रतिबंधात्मक नीति के रुख पर नहीं हैं।