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अमेरिका: कैपिटल दंगों का आरोपी हाउस अरेस्ट से बचा, कोर्ट ने दी चेतावनी

Sat, 05 Jun 2021 11:27 AM IST
प्रियंका तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला, वाशिंगटन

सार

वाशिंगटन के कैपिटल हिल इलाके में इसी साल जनवरी में हुए दंगे में जिस शख्स को आरोपी बनाया गया, अदालत ने उसे नजरबंद करने का आदेश देने से मना कर दिया।
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इसी साल जनवरी में वाशिंगटन के कैपिटल हिल इलाके में भीड़ ने दंगा किया था - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अमेरिकी संसद के यूएस कैपिटल भवन में इसी साल जनवरी, 2021 में दंगे हुए थे। इस दौरान दंगाइयों की भीड़ पुलिस से भिड़ गई थी। इस मामले में पुलिस ने 50 राज्यों से लगभग 465 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर दंगा उकसाने के खिलाफ अदालती कार्रवाई जारी है। दंगे का आरोपी टिम ‘बेक्ड अलास्का’ जियोनेट नाम के एक शख्स को भी बनाया गया है। जियोनेट के केस में एक संघीय मजिस्ट्रेट ने शुक्रवार (4 जून) को कोर्ट में सुनवाई के दौरान उसे हाउस अरेस्ट करने का आदेश देने से इनकार कर दिया और कहा कि जियोनेट ने कोई कानून नहीं तोड़ा या अपनी रिहाई की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया।

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कोर्ट ने दी चेतावनी
दरअसल, जियोनेट ने एक शराबी दोस्त के साथ बहस करते हुए और दो बार पुलिस को फोन करके खुद का वीडियो बनाया। उसने पुलिसकर्मियों से बदसलूकी भी की। अमेरिकी न्यायाधीश जी. माइकल हार्वे ने जियोनेट को चेतावनी दी कि उसने खतरनाक तरीके से काम किया और कोई अपराध कर सकता था। बता दें, जियोनेट अलास्का के एंकोरेज का रहने वाला है और अपने सोशल मीडिया प्रदर्शनों के माध्यम से दक्षिणपंथी राजनीति में काफी प्रसिद्ध है। वाशिंगटन, डीसी में दंगे के 10 दिन बाद जियोनेट को गिरफ्तार किया गया था, उस पर हिंसक प्रदर्शन और बुरा व्यवहार करने और जानबूझकर वैध अधिकार के बिना प्रतिबंधित इमारत में प्रवेश करने का आरोप लगाया गया था।

न्यायाधीश ने खारिज कीं सिफारिशें
उल्लेखनीय है कि 6 जनवरी, 2021 को जियोनेट ने एक लाइव वीडियो स्ट्रीम किया जिसमें वह कैपिटल के अंदर अन्य प्रदर्शनकारियों को दंगा करने के लिए प्रोत्साहित करते दिखा। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस दौरान जियोनेट ने एक पुलिस अधिकारी से बहस की और उसे ‘शपथ तोड़ने वाला’ कह डाला। इधर, जियोनेट के वकील ने कहा है कि जो कुछ हुआ वह केवल उसे फिल्माने के लिए वाशिंगटन गया था। जियोनेट के मामले में प्री-ट्रायल सर्विस ऑफिसर ने होम डिटेंशन को लागू करने और जियोनेट को सोशल मीडिया या अन्य वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म पर वीडियो पोस्ट करने पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी, लेकिन न्यायाधीश ने दोनों सिफारिशों को खारिज कर दिया। 

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