अमेरिका में पर्यटकों की संख्या में कमी आने की संभावना।
- फोटो : US Consulate
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका की सत्ता में आने के बाद से ही पूरी दुनिया में हलचल मची है। दरअसल, ट्रंप ने घरेली मुद्दों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी जबरदस्त तरह से हस्तक्षेप किया हो। फिर चाहे वह अमेरिका के पड़ोसी कनाडा का मुद्दा हो, सहयोगी यूरोपीय संघ (ईयू) के मुद्दे हों या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सबसे करीबी भारत की बात। ट्रंप ने नीतियों ने हर देश पर किसी न किसी तरह से असर डाला है। इस बीच हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका में पर्यटकों की संख्या में बीते कुछ समय में गिरावट आई है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका पर्यटन के लिहाज से कितना पसंद किया जाता रहा है? डोनाल्ड ट्रंप उसकी इस साख को कैसे प्रभावित कर रहे हैं? अमेरिका में पर्यटकों की संख्या कम होने की संभावना से जुड़ी सच्चाई क्या है? इसके अलावा अब अमेरिका की जगह दुनियाभर के पर्यटक कहां जाने पर विचार कर रहे हैं? आइये जानते हैं...
पर्यटन के लिहाज से कितना अहम रहा है अमेरिका?
गौरतलब है कि अमेरिका दुनिया के तीन सबसे ज्यादा पर्यटन वाले देशों में से रहा है। खासकर राजधानी वॉशिंगटन, न्यूयॉर्क, शिकागो और लास वेगास जैसे शहरों की वजह से। इसके अलावा कई और दर्शनीय स्थलों और आधुनिकता की वजह से अमेरिका पर्यटकों के बीच चर्चा में रहा है। यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 में कुल 6.65 करोड़ लोग अमेरिका गए थे और 2024 का आंकड़ा इससे ज्यादा रहने की संभावना है।
हालांकि, अमेरिका में इस साल काफी कुछ बदल चुका है। खासकर डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका में राष्ट्रपति बनने के बाद से। ट्रंप ने बीते ढाई महीने में ही अपने फैसलों और बयानों से कूटनीतिक रिश्तों की नई परिभाषा लिखना शुरू कर दिया। माना जा रहा है कि ट्रंप के इन्हीं आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय फैसलों ने पर्यटकों को अमेरिका से दूर कर दिया है।
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अमेरिका जाने वाले पर्यटकों की संख्या में कितनी कमी आने की संभावना?
रिसर्च फर्म- टूरिज्म इकोनॉमिक्स के मुताबिक, ट्रंप के आने के बाद से अब अमेरिका में पर्यटन कम होने का अनुमान है। यह गिरावट इस साल 5.5 फीसदी तक रह सकती है। जबकि पिछले साल तक अमेरिका के पर्यटन में 9 फीसदी का उछाल आने की उम्मीद जताई गई थी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर ट्रंप आयात शुल्क और व्यापार युद्ध शुरू करने की कोशिश करते हैं तो इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में और कमी आ सकती है और अमेरिका में पर्यटकों के खर्च में 18 अरब डॉलर (करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये) की कमी आ सकती है।
...तो क्या सच में कम होने लगी अमेरिका जाने वाले पर्यटकों की संख्या?
अमेरिका आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी के कुछ सबूत मिलने भी लगे हैं। कनाडा के बॉर्डर डाटा को देखा जाए तो जबसे ट्रंप ने कनाडा के कुछ उत्पादों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का एलान किया है, तबसे कनाडा से सड़क मार्ग से अमेरिका आने वाले लोगों की संख्या में कुछ दिन 45 फीसदी तक की गिरावट आई है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति बिल्कुल 2020-21 की तरह है, जब कोरोनावायरस की वजह से सीमाओं से लोगों का आना-जाना लगभग बंद हो गया था।
गौरतलब है कि अमेरिका के लिए पर्यटकों का सबसे बड़ा स्रोत कनाडा ही है। हालांकि, कनाडा की एयरलाइन कंपनी एयर कनाडा तक का कहना है कि यात्रियों की कमी के चलते वह अमेरिका में कई हॉलीडे डेस्टिनेशन तक उड़ानों में कमी कर रही है। इनमें लास वेगास की फ्लाइट्स में कमी का फैसला भी शामिल है।
सिर्फ कनाडा की ही बात कर लें तो मार्च में एक मार्केट रिसर्च कंपनी लेगर के पोल के मुताबिक, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका यात्रा के लिए तैयारी करने वाले करीब 36 फीसदी लोगों ने अपनी आगामी ट्रिप को रद्द कर दिया है। इसके अलावा हवाई यात्राओं का विश्लेषण करने वाली संख्या ओएजी (OAG) ने कहा है कि अगर पिछले साल और इस साल के अब तक के डाटा की तुलना की जाए तो कनाडा से अमेरिका जाने वाले यात्रियों की संख्या में करीब 70 फीसदी की कमी आई है।
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यह आंकड़े ऐसे समय में आए हैं, जब अमेरिका के पर्यटन एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि अगर कनाडा से आने वाले लोगों की संख्या में 10 फीसदी की भी गिरावट आती है तो अमेरिका में होने वाले खर्च में 2.1 अरब डॉलर की कमी देखी जा सकती है। इससे 1 लाख 40 हजार हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़ी नौकरियों पर खतरा आ सकता है।
क्या ट्रंप के सत्ता में आने की वजह से कम हो रहा है पर्यटन?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेश से अमेरिका जाने की योजना बना कर रद्द करने वाले अधिकतर लोगों का कहना है कि अमेरिका में राजनीतिक माहौल लगातार बाहरी लोगों के लिए खराब होता जा रहा है। खासकर ट्रंप के कार्यकाल में जिस तरह विदेशियों, अप्रवासियों और एलजीबीटी समुदाय को लेकर धारणा पैदा की जा रही है, इससे बड़ी संख्या में यात्रियों में ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर संशय है और वे अमेरिका जाने से बचने पर जोर दे रहे हैं।
इतना ही नहीं पश्चिमी यूरोप, जहां से पिछले साल 37 फीसदी यात्री अमेरिका पहुंचे थे, उस क्षेत्र में आने वाले देशों (जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स) को लेकर ट्रंप के बयानों ने लोगों में रोष पैदा किया है। ट्रंप ने यूरोपियन संघ पर जवाबी आयात शुल्क लगाने की धमकी भी दी है और बीते कुछ समय में रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद व्लादिमीर पुतिन का समर्थन किया है। यूरोप में इसे लेकर ट्रंप का विरोध जारी है और लोगों ने पर्यटन के लिए अमेरिका जाने के फैसले पर दोबारा विचार शुरू कर दिया है।
सर्वे एजेंसी- YouGov की तरफ से मार्च में किए गए एक सर्वेक्षण में सामने आया कि ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से पश्चिमी यूरोपीय देशों में अमेरिका के प्रति रुख नकारात्मक हुआ है। अमेरिका को लेकर नवंबर 2016 से शुरू किए जा रहे इस सर्वे में जिन सात देशों को शामिल किया गया, उनमें से पांच में अमेरिका की सकारात्मक छवि में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है।
अमेरिका में विदेशियों के साथ हो रही घटनाओं का भी पड़ा असर
ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका में कई विदेशी नागरिकों के साथ क्रूर व्यवहार की घटनाएं सामने आई हैं। मार्च में ही एक ब्रिटिश महिला को वीजा प्रक्रिया में समस्या की वजह से हथकड़ी लगाकर हिरासत में रखा गया था। इसी महीने अमेरिका-मैक्सिको बॉर्डर पर एक कनाडाई नागरिक को वीजा रिन्यू कराने के दौरान हिरासत में ले लिया गया। 12 दिन हिरासत में रखे जाने के दौरान उसे भीड़ भरे कैदखाने में जंजीर में बांधकर रखा गया।
इसके चलते अधिकतर देशों ने अमेरिका जा रहे अपने नागरिकों को एडवायजरी भी जारी की हैं।
दरअसल, अमेरिका में अपनी लैंगिक पहचान छिपाने वाले यात्रियों को भी अपने जन्म के समय के लिंग का खुलासा करना जरूरी है। ऐसे में कुछ देश के नागरिकों को अमेरिका में परेशानी आने की संभावना है।
अमेरिका के बजाय कहां जा रहे पर्यटक?
जैसे-जैसे दुनियाभर में लोग अमेरिका यात्रा रद्द कर रहे हैं, वैसे ही कुछ और स्थलों में पर्यटन में उछाल आने की संभावना देखी जा रही है। इनमें सबसे ऊपर है बरमूडा, जहां बीते कुछ दिनों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। कई कनाडाई नागरिकों ने भी अपने व्यापार को अमेरिका से हटाकर बरमूडा ले जाने का मन बनाया है। इसके अलावा छुट्टियों के लिए भी बरमूडा लोगों की पसंद बन रहा है। माना जा रहा है कि अगर सिर्फ कनाडा के ही लोग अमेरिका छोड़कर बरमूडा को पर्यटन के लिए चुनते हैं तो उसके राजस्व में 20 फीसदी का इजाफा हो सकता है।
इतना ही नहीं यूरोप में भी बुकिंग में बढ़ोतरी देखी गई है। गर्मियों के सीजन में यूरोपीय संघ में होटल रिजर्वेशन में पिछले साल के मुकाबले 32 फीसदी का उछाल देखा गया है।
फीफा विश्व कप-ओलंपिक खेलों को लेकर जताई जा रही चिंता
अमेरिका में सख्त होती वीजा नीतियों, ट्रंप प्रशासन में बढ़ते लैंगिक-धार्मिक भेदभाव (इस्राइल फलस्तीन मुद्दे और ट्रांसजेंडरों के मुद्दे पर) और प्रवासियों को डिपोर्ट किए जाने जैसे मुद्दे उठने के बाद लोगों ने अमेरिका में होने वाले 2026 के फीफा विश्व कप और 2028 के ओलंपिक खेलों के आयोजन पर चिंता जताई है। दरअसल, मौजूदा समय में ब्राजील, कनाडा और मैक्सिको के लोगों को वीजा हासिल करने के लिए 700 दिन तक का समय लग रहा है। ऐसे में इन आयोजनों के फैंस में डर है कि उन्हें आगे अमेरिका आने की अनुमति नहीं मिल पाएगी।
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