अमेरिका ने पिछले साल के राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप करने और अमेरिकी संघीय एजेंसियों में सेंधमारी करने के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराते हुए गुरुवार को उसके 10 राजनयिकों को निष्कासित करने तथा 30 से अधिक लोगों एवं प्रमुख वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।
इन प्रतिबंधों को सात साल पहले यूक्रेन से अलग होकर बने क्रीमिया पर रूस के सतत कब्जे और अफगानिस्तान में अमेरिका तथा गठबंधन बल के सैनिकों पर हमलों के लिए कथित रूप से इनाम घोषित करने के खिलाफ की गयी कार्रवाई के तौर पर भी देखा जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कांग्रेस को लिखे पत्र में कहा कि उन्होंने रूस की नुकसानदेह गतिविधियों और खासतौर पर निष्पक्ष एवं स्वतंत्र लोकतांत्रिक चुनाव की प्रक्रिया को कमजोर करने के प्रयासों आदि पर विचार किया है। रूस ने अमेरिकी चुनावों में संलिप्तता या इनाम घोषित करने जैसे आरोपों को खारिज किया है। उसका यह भी कहना है कि सोलरविंड्स कम्प्यूटर हमलों से उसका कोई लेनादेना नहीं है।
बाइडन प्रशासन ने विदेश विभाग और वित्त विभाग के साथ तालमेल करते हुए शासकीय आदेश में प्रतिबंधों की घोषणा की। शासकीय आदेश में यह संदेश दिया गया है कि अगर रूस अपनी अस्थिरता पैदा करने वाली अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को जारी रखता है या बढ़ाता है तो अमेरिका उस पर रणनीतिक एवं आर्थिक रूप से प्रभावी कार्रवाई करेगा।
शासकीय आदेश के बाद वित्त विभाग ने एक निर्देश जारी किया जो अमेरिकी वित्तीय संस्थानों को सेंट्रल बैंक ऑफ रशियन फेडरेशन, नेशनल वेल्थ फंड ऑफ रशियन फेडरेशन या रूसी फेडरेशन के वित्त मंत्रालय द्वारा 14 जून, 2021 के बाद जारी रूबल या गैर-रूबल बांडों के लिए प्राथमिक बाजार में भागीदारी पर रोक लगाता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले महीने आरोप लगाया था कि रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मदद के लिए एक अभियान की मंजूरी दी थी ताकि ट्रंप पुन: राष्ट्रपति बन सकें, लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि रूस या किसी अन्य ने मतों में या परिणामों में हेरफेर की।
गुरुवार को घोषित प्रतिबंधों में छह रूसी कंपनियों पर पाबंदियां शामिल हैं जो देश की साइबर गतिविधियों में मदद करती हैं। इसके अलावा पिछले साल के राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप की कोशिश करने तथा दुष्प्रचार करने के आरोपों में 32 लोगों और निकायों पर प्रतिबंध लगाये गये थे।
व्हाइट हाउस ने कहा कि जिन 10 राजनयिकों को निकाला गया है उनमें रूसी खुफिया सेवाओं के प्रतिनिधि शामिल हैं। उसने यह भी कहा कि बाइडन इन खबरों पर प्रतिक्रिया देने के लिए राजनयिक, सैन्य और खुफिया चैनल का इस्तेमाल कर रहे हैं कि रूस ने तालिबान को अफगानिस्तान में अमेरिका और सहयोगी देशों के सैनिकों पर हमले के लिए उकसाया था।