यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धि) के संभावित खतरों को नियंत्रित करने की पहल की है। दुनिया में अपनी तरह की ये पहली कोशिश है। यूरोप में किन क्षेत्रों और किस हद तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को इजाजत दी जाएगी, इस बारे में ईयू ने नियमों का एक ड्राफ्ट तैयार किया है। हालांकि ये ड्राफ्ट औपचारिक रूप से 21 अप्रैल को जारी किया जाएगा, लेकिन वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू को इसका मसविदा हाथ लग गया है। इसके मुताबिक यूरोप में अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में एआई के इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। जो कंपनियां ऐसा करने पर राजी नहीं होंगी, उनके ईयू क्षेत्र में प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर दो करोड़ यूरो या उनके कुल टर्नओवर के चार फीसदी हिस्से तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
मसौदे में कहा गया है कि ईयू इस मामले में सबसे अलग नजरिया अपनाना चाहता है। वह नहीं चाहता कि अमेरिका की तरह एआई संचालित तकनीक को पूरी तरह टेक कंपनियों के हाथ में छोड़ दिया जाए। ना ही वह चीन की तरह इन तकनीकों का इस्तेमाल आम निगरानी के लिए करने के पक्ष में है। इनके उलट वह ‘मानव केंद्रित’ नजरिया अपनाना चाहता है, जिसके तकनीक को बढ़ावा मिले, लेकिन यह निजता सुरक्षा के कानूनों के लिए खतरा ना बन जाए।
इस दस्तावेज से ईयू का यह नजरिया सामने आया है कि मैनुफैक्चरिंग, जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग और ऊर्जा ग्रिड को और कुशल बनाने जैसे कार्यों में एआई सिस्टम को स्वागत किया जाएगा। जबकि कर्मचारियों के सीवी की जांच, उनकी विश्वसनीयता की पड़ताल, सामाजिक सुरक्षा के लाभ देने, शरण पाने संबंधी या वीजा अर्जियों, कानूनी फैसला लिखने में जजों की सहायता आदि जैसी कार्यों को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र घोषित कर दिया जाएगा। अभी इन सभी कार्यों में तकनीक एल्गोरिद्म का इस्तेमाल हो रहा है। नए नियम लागू होने पर इन रोक लग सकती है।
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक ऐसे एआई सिस्टमों पर रोक लगाई जाएगी, जिनका इस्तेमाल मनुष्य के व्यवहार, विचार या निर्णयों को ढालने, मनुष्य की कमजोरियों का फायदा उठाने या उन्हें निशाना बनाने या सार्वजनिक निगरानी के लिए किया जा सकता है। लेकिन नए नियमों के तहत कुछ अपवादों को भी शामिल किया जाएगा। मसलन, अधिकारी गंभीर अपराधों का मुकाबला करने में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल कर सकेंगे। सीमित समय और सीमित इलाके में फेशियल रिकॉग्निशन (चेहरे से पहचान) जैसी सार्वजनिक निगरानी तकनीकों के इस्तेमाल की इजाजत दी जाएगी। फेशियल रिकॉग्निशन कैमरों का इस्तेमाल आतंकवादियों की पहचान के लिए किया जा सकेगा।
जानकारों का कहना है कि प्रस्तावित नियमों में शामिल किए गए अपवाद विवादास्पद हैं और इनका डिजिटल अधिकार समर्थक संगठनों की तरफ से विरोध किया जा सकता है। डिजिटल अधिकार संगठन ईडीआरआई की कार्यकर्ता एला जाकुबोवस्का ने वेबसाइट पोलिटिको.ईयू से कहा- ‘देशों के अधिकारियों को ऐसी तकनीक के इस्तेमाल के बारे में फैसला करने का अधिकार देना उस गलती या खामी को दोहराना है, जैसा मौजूदा कानूनों के मामले में हुआ है। इस वजह से इन कानूनों का व्यापक दुरुपयोग हुआ है और हमें क्षति पहुंची है।’
ड्राफ्ट में एक यूरोपियन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बोर्ड बनाने का प्रस्ताव किया गया है। कहा गया है कि इसमें ईयू के सदस्य सभी देशों के एक-एक प्रतिनिधि को रखा जाएगा। साथ ही इसमें ईयू के डेटा संरक्षण अधिकारी और यूरोपीय आयोग के प्रतिनिधि भी रहेंगे। इस बोर्ड का काम ईयू के देशों में प्रस्तावित नियमों के पालन की निगरानी करना होगा।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इन नियमों का बड़ी टेक कंपनियों की तरफ से कड़ा विरोध होने की संभावना है। इन नियमों के अमल में आने से यूरोपीय बाजार उनके लिए अभी जितना आकर्षक नहीं रह जाएगा। इसलिए वे आसानी से इन नियमों को मंजूर नहीं करेंगी।