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US Election Results 2020: ट्रंप की कानूनी याचिकाओं का अब क्या होगा? समर्थकों को जजों से उम्मीद

Mon, 09 Nov 2020 05:08 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

  • ट्रंप के नियुक्त जजों के लिए भी तथ्यों को नजरअंदाज करना मुश्किल
  • बीस साल पहले भी वोटों की दोबारा गिनती कराई गई थी, जो पूरी न हो सकी थी
  • इस बार भी ट्रंप की याचिकाओं के बावजूद फैसला पलटने की उम्मीद नहीं
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US President Election Results 2020 - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी ने रविवार रात (भारतीय समय के अनुसार सोमवार सुबह) ताजा चुनाव नतीजों पर सवाल उठाने का अभियान छेड़ दिया। ट्रंप के समर्थक चैनल- फॉक्स न्यूज पर एक के बाद एक रिपब्लिकन पार्टी के प्रवक्ता अपनी दलीलें पेश करने के लिए उपस्थित हुए। उनकी कही बातों के क्लिप राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ट्वीट करते रहे।

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शनिवार रात न्यूज मीडिया ने जैसे ही ये एलान किया था कि डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन ने इलेक्ट्रोरल कॉलेज में जीत के लिए जरूरी 270 से ज्यादा सदस्य हासिल कर लिए हैं, तो ट्रंप ने ट्वीट कर कहा था कि बाइडन खुद को विजेता घोषित करने की जल्दबाजी ना दिखाएं। उन्होंने कहा था कि सोमवार से उनकी टीम अलग-अलग राज्यों में चुनाव नतीजों की वैधता को चुनौती देना शुरू कर देगी।

इस बीच अमेरिका के कई शहरों में ट्रंप समर्थकों ने प्रदर्शन भी किए। उनके बैनरों पर लिखा था कि ‘इस चुनाव को हमसे चुराया गया है।’ मीडिया से बातचीत में इन प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक कानूनी याचिकाओं का निपटारा नहीं होता, बाइडन को विजेता घोषित करना गलत है। तो कुल मिलाकर अब ध्यान ट्रंप टीम की ओर से दाखिल की जा रही याचिकाओं और उनके भविष्य पर केंद्रित हो रहा है।
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ट्रंप की टीम को उम्मीद यह है कि बात आखिर सुप्रीम कोर्ट में आएगी, जहां ट्रंप के नियुक्त किए जजों के समेत छह कंजरवेटिव जज हैं। मगर कानूनी जानकारों का कहना है कि ये जज भी आखिरकार फैसला तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही देंगे। इसलिए चुनाव परिणाम पलटने की संभावनाएं मजबूत नहीं हैं।

ट्रंप की टीम ने पेंसिल्वेनिया राज्य से आई इस खबर को खूब प्रचारित किया है कि वहां जो मतपत्र दोषपूर्ण पाए गए, उन्हें गिनती के समय सुधारने की इजाजत दी गई। ट्रंप की टीम ने इसे गैर-कानूनी कहा है। लेकिन वेबसाइट प्रोपब्लिका.ओरआजी ने वॉशिंगटन के डिस्ट्रिक्ट जज सैवेज से बात की, तो उन्होंने कहा- मुझे समझ में नहीं आता कि इससे चुनाव की साख कैसे प्रभावित हुई। उन्होंने ध्यान दिलाया कि ऐसा महज 93 मतपत्रों में किया गया, जबकि वहां ट्रंप कई हजार वोटों से पिछड़े हैं।

इसी तरह लॉस एंजिल्स स्थित लॉयला लॉ स्कूल के प्रोफेसर जस्टिन लेविट ने इस वेबसाइट से कहा कि अगर किसी याचिका में ऐसे सबूत नहीं दिए गए हों, जिनसे संवैधानिक या कानूनी उल्लंघन साबित होता हो, तो फिर किसी याचिका का महत्व फीस देकर दाखिल किए गए ट्वीट संदेश से ज्यादा नहीं होता।

इस प्रकरण में अक्सर साल 2000 के चुनाव का जिक्र आ रहा है। तब फ्लोरिडा राज्य के नतीजे पर विवाद हो गया था, जबकि वह निर्णायक महत्त्व का था। वहां मतों की फिर से गिनती शुरू कराई गई, लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी। इसकी रफ्तार इतनी धीमी थी कि 14 दिसंबर की तारीख करीब आ गई, जिस रोज इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य औपचारिक रूप से राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।

तब इलेक्टोरल कॉलेज की बैठक से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला दे दिया कि चूंकि शुरुआती तौर पर रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉर्ज डब्लू बुश आगे थे, इसलिए उन्हें विजेता माना जाएगा। चूंकि ट्रंप की टीम कई राज्यों में दोबारा गिनती की मांग कर रही है, इसलिए ये सवाल चर्चित है कि क्या फिर वही कहानी दोहराई जाएगी।

आने वाले दिनों में घटनाएं क्या मोड़ लेती हैं, ये देखने पर दुनिया की निगाहें टिकी होंगी। मगर एक बात साफ है कि ट्रंप अपने समर्थकों की नजर में इस चुनाव की साख नष्ट करने में कामयाब रहे हैं। इससे देश के मत विभाजन को पाटने का वादा निभाना नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए डेढ़ी खीर साबित हो सकता है।

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