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US Election Results 2020: बिडेन भले ही चुनाव जीत जाएं, लेकिन 'रेड अमेरिका' के राष्ट्रपति बने रहेंगे डोनाल्ड ट्रंप!

Thu, 05 Nov 2020 03:11 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

डोनाल्ड ट्रंप की श्वेत नस्लवाद की राजनीति खासी कारगर साबित हुई है। इसकी वजह से कोविड-19 महामारी को संभालने में उनकी नाकामी सबसे प्रमुख मुद्दा नहीं बन पाया। एग्जिट पोल से जाहिर हुआ कि मतदाताओं की निगाह में सबसे अहम मुद्दा अर्थव्यवस्था था, महामारी नहीं...
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Donald Trump During Campaign - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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उम्मीद के मुताबिक ही इस बार अमेरिका में मतगणना लंबी खिंची है। लेकिन एक बात कुछ घंटों में साफ हो गई कि जिस ‘ब्लू वेव’ यानी नीली लहर की भविष्यवाणी ज्यादातर ओपिनियन पोल्स में की गई थी, उसका कहीं संकेत नहीं मिला। अमेरिका में नीले रंग को डेमोक्रेटिक पार्टी और लाल रंग को रिपब्लिकन पार्टी का प्रतीक कहा जाता है। अनुमान यह लगाया गया था कि कोरोना महामारी को संभालने में ट्रंप प्रशासन की नाकामी और उसकी वजह से आई आर्थिक तबाही के कारण इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में लहर चलेगी। लेकिन जो असली नतीजे सामने आए, उससे असल में रेड किले के काफी मजबूत होने का संकेत मिला।

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राष्ट्रपति चुनाव में लंबे संशय के बाद जाकर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बिडेन ऐसी बढ़त बना पाए, जिससे उनके ह्वाइट हाउस पहुंचने की उम्मीद जाग पाती। मगर ये साफ है कि चुनाव उनके लिए आसान साबित नहीं हुआ। संसदीय चुनाव में तो असल में उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी को नुकसान हुआ। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी पिछले सदन की तुलना में इस बार पांच सीटें कम मिली हैं। सीनेट में बड़ा बहुमत पाने का उसका सपना भी धरा ही रह गया।

सियासत के जानकारों ने चुनाव नतीजों का रूझान साफ होने के बाद कहा कि चार साल पहले की तरह चुनाव पूर्व सर्वे करने वाली एजेंसियां एक बार फिर गलत साबित हुई हैं। अब जानकार इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इन एजेंसियों ने जो बिडेन की ताकत को बढ़ा-चढ़ा कर आंकने की गलती कैसे की। पिछली बार की तरह ही एजेंसियों की तरफ से ये सफाई दी गई है कि ट्रंप समर्थकों ने अपनी प्राथमिकता खुलकर नहीं बताई। वे ना सिर्फ खामोश रहे, बल्कि उन्होंने झूठ बोला। लेकिन अगर ये बात सच हो, तब भी ये प्रश्न अपनी जगह बना रहेगा कि आखिर अब सर्वे एजेंसियों पर कोई क्यों और कैसे भरोसा करेगा?
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ताजा चुनाव अमेरिकी समाज में हो चुके तीखे ध्रुवीकरण का प्रमाण बना है। जानकारों के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप की श्वेत नस्लवाद की राजनीति खासी कारगर साबित हुई है। इसकी वजह से कोविड-19 महामारी को संभालने में उनकी नाकामी सबसे प्रमुख मुद्दा नहीं बन पाया। एग्जिट पोल से जाहिर हुआ कि मतदाताओं की निगाह में सबसे अहम मुद्दा अर्थव्यवस्था था, महामारी नहीं। और मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग ट्रंप की इस बात से इत्तेफाक रखता है कि ट्रंप प्रशासन ने अर्थव्यवस्था को ठीक से संभाला है। ट्रंप प्रचार अभियान के दौरान लगातार कहते रहे कि महामारी आने के पहले अमेरिकी अर्थव्यवस्था शानदार प्रदर्शन कर रही थी। चुनाव से साफ हुआ है कि ऐसा मानने वाला अमेरिका में एक बहुत बड़ा समूह है।

अमेरिका में इन चुनावों से जाहिर हुए सामाजिक ध्रुवीकरण की तरफ इशारा करते हुए वहां की मशहूर पत्रिका ‘द न्यूयॉर्कर’ ने अपनी वेबसाइट पर एक टिप्पणी में लिखा है कि बिडेन भले चुनाव जीत जाएं, लेकिन ट्रंप “रेड अमेरिका” के राष्ट्रपति बने रहेंगे। यानी वो एक ऐसे बड़े समुदाय का नेता बने रहेंगे, जिसे ट्रंप ने अपने उग्र सियासी अंदाज से गोलबंद किया है। पत्रिका के मुताबिक यह देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है, क्योंकि यह सामाजिक अशांति का जनक बन सकता है।

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