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ट्रूडो को फंसाया अब भारत पर ट्रंप की नजर!: किन देशों को दी टैरिफ लगाने की धमकी, कैसे निपटेगी मोदी सरकार, जानें

Thu, 19 Dec 2024 06:01 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

यह जानना अहम है कि ट्रंप ने भारत को लेकर क्या कहा है? वे इस तरह की धमकियां किन-किन देशों को दे चुके हैं? उनके टैरिफ से जुड़े बयानों का बाकी देशों पर क्या असर पड़ा है? और उनके पिछले कार्यकाल के दौरान भारत के खिलाफ उठाए गए कदमों का क्या प्रभाव हुआ था? आइये जानते हैं...
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अमेरिका का टैरिफ युद्ध। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान कैसे पूरी दुनिया में हलचल मचा सकते हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां उनकी टैरिफ लगाने की धमकियों ने कनाडा की राजनीति में भूचाल ला दिया है, वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तक को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के जरिए व्यापार हितों को सुरक्षित रखने की बात कहनी पड़ी है। इस बीच अब ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाने को लेकर भी बयान दिया है। माना जा रहा है कि ट्रंप की यह धमकियां कई गंभीर परिणाम ला सकती हैं। हालांकि, भारत की तरफ से अब तक ट्रंप के बयानों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। 
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इस बीच यह जानना अहम है कि ट्रंप ने भारत को लेकर क्या कहा है? वे इस तरह की धमकियां किन-किन देशों को दे चुके हैं? उनके टैरिफ से जुड़े बयानों का बाकी देशों पर क्या असर पड़ा है? और उनके पिछले कार्यकाल के दौरान भारत के खिलाफ उठाए गए कदमों का क्या प्रभाव हुआ था? आइये जानते हैं....
 

भारत को लेकर क्या बोले हैं ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत अमेरिका के कुछ उत्पादों पर काफी ज्यादा शुल्क लगाता है और उन्होंने एक बार फिर इसके बदले में भारतीय उत्पादों पर इसी तरह ज्यादा शुल्क लगाने की बात कही है। ट्रम्प ने मार-ए-लागो में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीन के साथ संभावित व्यापार समझौते पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘अगर भारत हमसे 100 प्रतिशत शुल्क लेता है, तो क्या हम उससे बदले में कुछ नहीं लेंगे? आप वाकिफ हैं, वे साइकिल भेजते हैं और हम उन्हें साइकिल भेजते हैं। वे हमसे 100 और 200 प्रतिशत शुल्क लेते हैं। भारत बहुत ज्यादा शुल्क लेता है। ब्राजील भी बहुत ज्यादा शुल्क लेता है। अगर वे हमसे शुल्क लेना चाहते हैं तो ठीक है, लेकिन हम उनसे इसी तरह ज्यादा शुल्क लेंगे।’’

किन-किन देशों को धमकियां दे चुके हैं ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से अमेरिका के व्यापार में साझेदार देशों पर टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाने के समर्थन में रहे हैं। फिर चाहे वह चीन हो, यूरोपीय देश हों, कनाडा हो, मैक्सिको हो, भारत हो या अमेरिका के कुछ और मित्र देश। अपने पहले कार्यकाल में भी ट्रंप ने कई देशों के उत्पादों पर आयात शुल्क लगा दिया था। बकौल ट्रंप वे उन देशों पर टैरिफ लगाने के समर्थक हैं, जो निर्यात किए गए अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाते हैं। यानी वे टैरिफ-पर-जैसे को तैसा नीति को मानते हैं। 

I). चीन को मिली हैं सबसे ज्यादा धमकियां
ट्रंप ने 2024 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के साथ ही एलान किया था कि वह चीन पर टैरिफ को बढ़ा सकते हैं और इसे 60 फीसदी तक पहुंचा सकते हैं। इतना ही नहीं एक नशीले पदार्थ फेंटानिल का आयात न रोकने पर ट्रंप ने चीन को इसके ऊपर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। 

गौरतलब है कि अपने पहले कार्यकाल में भी ट्रंप ने चीन के कई उत्पादों पर 25 फीसदी तक टैरिफ लगा दिया था। चौंकाने वाली बात यह है कि चीन के साथ बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा के चलते बाइडन सरकार ने भी ट्रंप के बढ़े हुए टैरिफ के फैसले को नहीं बदला। हालांकि, अब दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने फिर चीन पर आयात शुल्क बढ़ाने की धमकी दे दी है। हालांकि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग साफ कर चुके हैं कि इस व्यापार युद्ध का कोई विजेता नहीं होगा और ट्रंप के इन कदमों के जवाब में वे भी चीन के हितों की रक्षा करेंगे।

II). टैरिफ की धमकी से कनाडा-मैक्सिको में सियासी उथल-पुथल
ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने के कुछ दिन बाद ही कनाडा और मैक्सिको पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का एलान किया था। डोनाल्ड ट्रंप की इन धमकियों का सबसे ज्यादा असर कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार पर हुआ है, जहां सियासी उथल-पुथल के बीच उप-प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने इस्तीफा दे दिया और ट्रंप की धमकियों को गंभीर खतरा बताया। इसके बाद खुद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कुर्सी पर खतरा पैदा हो गया है। दरअसल, ट्रंप के टैरिफ लगाने की धमकियों की वजह से चुनावी साल में कनाडा में मंदी का खतरा पैदा हो गया है। इस स्थिति को न सुलझा पाने के चलते विपक्ष के साथ-साथ अब उनकी खुद की लिबरल पार्टी के करीब 60 सांसदों ने इस मसले को न सुलझा पाने के लिए ट्रूडो से इस्तीफे की मांग कर दी।

दूसरी तरफ मैक्सिको से आयात होने वाली कारों पर ट्रंप ने 1000 फीसदी तक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति का आरोप है कि कनाडा और मैक्सिको से आने वाले शरणार्थियों और नशीले पदार्थों को न रोके जाने की स्थिति में इन देशों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि, कनाडा से उलट मैक्सिको के राष्ट्रपति ने कहा है कि इससे दोनों देशों के व्यापार पर असर पड़ेगा और महंगाई बढ़ने के साथ नौकरियों का नुकसान होगा। मैक्सिको के वित्त मंत्री ने कहा है कि उनके पास अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाने के अलावा कोई  चारा नहीं रहेगा। 

गौरतलब है कि अमेरिका के लिए चीन, मैक्सिको और कनाडा व्यापार के तीन सबसे बड़े साझेदार हैं। 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, इन देशों ने अमेरिका से 830 अरब डॉलर का आयात किया है, जबकि अमेरिका को 1.43 अरब डॉलर का निर्यात किया है।
 

III). भारत पर ट्रंप की निगाह
इस बीच अब ट्रंप की निगाह भारत में आयात शुल्क लगाने पर है। चीन, कनाडा और मैक्सिको की तरह नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने अब तक यह खुलासा नहीं किया है कि वह भारत से होने वाले आयात पर किस दर से टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि उनका यह कदम जल्द ही आ सकता है। 

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत को इस तरह की धमकी दी है। अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप ने व्यापार क्षेत्र में भारत के लिए मुश्किलें खड़ी की थीं। अपने शासनकाल में उन्होंने भारत को अमेरिका के तरजीही व्यापार कार्यक्रम (प्रीफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट) से बाहर कर दिया था। इस कार्यक्रम के तहत पहले विकासशील देश के व्यापारियों को अमेरिकी बाजारों में कम आयात शुल्क चुकाकर एंट्री की इजाजत मिल जाती थी। हालांकि, ट्रंप के इस लिस्ट से भारत को हटाने से भारतीय व्यापारियों के लिए अमेरिकी बाजार में एंट्री को मुश्किल कर दिया गया। 

इतना ही नहीं ट्रंप ने पहले कार्यकाल के दौरान भारत से आने वाले स्टील और एल्युमिनियम पर भी उच्च दर पर टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसके जवाब में भारत ने भी अमेरिका से आयात होने वाले बादाम और सेबों पर जवाबी टैरिफ लगाया था।

ट्रंप की ताजा धमकी का क्या हो सकता है असर?
माना जा रहा है कि ट्रंप की भारत को लेकर दी गई धमकी का असर उनके पहले कार्यकाल (2017 से 2021) से ज्यादा नहीं होगा। बल्कि इस बार भी दोनों देश पिछले कार्यकाल की तरह ही कुछ वस्तुओं पर टैरिफ को लेकर भिड़ सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में भारत के ऑटोमोबाइल, टेक्स्टाइल और फार्मास्यूटिकल (दवा निर्माण) से जुड़े सेक्टर को निशाना बना सकते हैं। 

इस पूरे घटनाक्रम में एक सबसे अहम बात है, अमेरिका और भारत के बदलते रिश्ते। जहां बीते वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत एक अहम ताकत बनकर उभर रहा है, वहीं अमेरिका भी वैश्विक स्तर पर चीन और रूस की साझा शक्ति का सामना कर रहा है। ऐसे में उसे अपनी कूटनीतिक जरूरतों के लिए भारत की जरूरत पड़ेगी। दूसरी तरफ आर्थिक स्तर पर एक बड़ा बाजार बनने के साथ ही ट्रंप के टैरिफ उत्पीड़न से सताए गए देशों के लिए भारत व्यापार का एक बड़ा जरिया भी बन सकता है। 
 
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भारत को कैसे हो सकता है फायदा?
ट्रंप के पहले कार्यकाल में भारत पर की गई कार्रवाइयों और धमकियों के बावजूद बीते वर्षों में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बनकर उभरा है। 2023-24 के व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक, जहां अमेरिका से भारत का आयात 42.2 अरब डॉलर रहा, तो वहीं अमेरिका को निर्यात 77.52 अरब डॉलर रहा। यानी अमेरिका फिलहाल भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। 

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति की टैरिफ लगाने की योजना भारत के लिए फायदेमंद भी हो सकती है। उदाहरण के तौर पर अगर अमेरिका ने चीन पर टैरिफ बढ़ाया तो उसे चीन से होने वाले आयात के विकल्पों को तलाशना पड़ेगा। यह भारत के निर्यातकों के लिए जगह भरने का अहम मौका होगा। ट्रंप के पिछले कार्यकाल में भी जब चीन पर टैरिफ में बढ़ोतरी की गई थी, तब अहम चीजों के आयात के लिए अमेरिकी कंपनियों ने भारतीय निर्यातकों का ही रुख किया था। 
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